दिल्ली में मोबाइल ड्राइविंग का बढ़ा खतरा, ट्रैफिक पुलिस ने कसी कमर

राजधानी दिल्ली की सड़कों पर रफ्तार के साथ-साथ अब एक नई मुसीबत 'डिस्ट्रैक्टेड ड्राइविंग' यानी ध्यान भटकने वाली ड्राइविंग तेजी से बढ़ रही है। लोग ड्राइविंग के दौरान सोशल मीडिया और मोबाइल मैसेज चेक करने को सड़क सुरक्षा से ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं, जो किसी बड़े हादसे को न्योता दे रहा है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली में वाहन चलाते समय मोबाइल का इस्तेमाल करने वालों की संख्या में चिंताजनक बढ़ोतरी देखी गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि गाड़ी चलाते समय फोन का इस्तेमाल करने से 'इनअटेंशनल ब्लाइंडनेस' की स्थिति पैदा होती है। इसका मतलब है कि ड्राइवर सामने देखते हुए भी सड़क की जरूरी चीजों को नजरअंदाज कर देता है। इंस्टीट्यूट ऑफ रोड ट्रैफिक एजुकेशन के रोहित बलुजा के अनुसार, मोबाइल का उपयोग करने वाले ड्राइवर की प्रतिक्रिया समय (Reaction Time) काफी धीमा हो जाता है, जो लगभग वैसा ही है जैसे शराब पीकर गाड़ी चलाना।
भारी जुर्माना और लाइसेंस सस्पेंड होने का खतरा
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने इस लापरवाही को रोकने के लिए सख्ती बढ़ा दी है। मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 184 के तहत वाहन चलाते समय मोबाइल का उपयोग करना 'खतरनाक ड्राइविंग' की श्रेणी में आता है। इसके लिए नियमों और जुर्माने का प्रावधान इस प्रकार है:
- पहली बार गलती पर: 1,000 रुपये से 5,000 रुपये तक का जुर्माना और तीन महीने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंड किया जा सकता है।
- बार-बार उल्लंघन पर: जुर्माना 10,000 रुपये तक बढ़ सकता है और सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
पुलिस के आंकड़े बताते हैं कि इस समस्या की गंभीरता को देखते हुए कार्रवाई में भारी इजाफा हुआ है। 1 जनवरी से 15 अप्रैल 2024 के बीच ऐसे मामलों में 149% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जहां 2023 की इसी अवधि में 6,369 लोगों पर कार्रवाई हुई थी, वहीं 2024 में यह संख्या बढ़कर 15,846 हो गई है।
ट्रैफिक पुलिस ने साफ किया है कि वाहन चलते समय किसी भी हैंडहेल्ड डिवाइस का उपयोग, सोशल मीडिया चेक करना या वीडियो देखना पूरी तरह प्रतिबंधित है। वहीं, देशभर में जागरूकता बढ़ाने के लिए 'आइज ऑन द रोड—नॉट ऑन द स्क्रीन' जैसे अभियान भी चलाए जा रहे हैं ताकि युवा पीढ़ी और छात्रों को सुरक्षित ड्राइविंग के प्रति जागरूक किया जा सके।