दिल्ली में इस साल डेंगू के मामलों को लेकर एक गंभीर डेटा संकट सामने आया है, जिससे स्वास्थ्य विभाग को बीमारी रोकने में परेशानी हो रही है। इस खबर में मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:दिल्ली में आधिकारिक तौर पर 570 डेंगू मामले दर्ज हैं, जिनमें से 36.5 प्रतिशत यानी 208 मरीज का पता नहीं चल पा रहा है, क्योंकि उनके पते गलत या अधूरे दर्ज हैं। दिल्ली स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह ने कहा है कि असल मामले 2,000 से 2,200 के बीच हो सकते हैं, जबकि महानगरपालिका (MCD) ने 22 अगस्त तक केवल 272 मामलों की पुष्टि की है।
पंजीकरण के दौरान गलत या अधूरे पतों के कारण स्वास्थ्य अधिकारी इन मरीजों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। कुल मामलों में से 90 मामले दिल्ली से बाहर के थे, जिससे राजधानी के भीतर केवल 272 मामलों को ही ट्रैक किया जा सका। MCD अधिकारियों का कहना है कि वे केवल उन्हीं मामलों की पुष्टि करते हैं जिनके आवासीय विवरण सही होते हैं, जबकि कई प्रयोगशालाएं बिना उचित सत्यापन के सरकार के पोर्टल पर डेटा अपलोड कर रही हैं। डेटा की इस कमी के कारण पांच साल पहले डेंगू को 'अधिसूचना योग्य बीमारी' बनाने का उद्देश्य कमजोर हो रहा है।
मंगलवार, 26 अगस्त 2026 को हुई एक समीक्षा बैठक के बाद, मंत्री पंकज कुमार ने नागरिक एजेंसियों को मच्छर नियंत्रण के उपायों को तेज करने का निर्देश दिया। डेंगू के प्रसार को रोकने के लिए, MCD ने आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया है, जिसमें मॉडल टाउन में नानी झील पर कीटनाशक छिड़कने के लिए ड्रोनों का उपयोग शामिल है। MCD के सभी 12 जोन में निरीक्षण तेज कर दिए गए हैं और मच्छर पैदा होने की स्थिति बनाने वालों के खिलाफ कानूनी नोटिस और कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
पता लगाए गए 272 मामलों के भौगोलिक विश्लेषण से पता चलता है कि पश्चिम जोन में सबसे अधिक 43 मामले हैं, इसके बाद सेंट्रल जोन में 34 और शाहदरा उत्तर में 27 मामले हैं। गौर करने वाली बात यह है कि ट्रैकिंग में आ रही इन तमाम मुश्किलों के बावजूद, साल 2026 में अब तक दिल्ली में डेंगू से एक भी मौत दर्ज नहीं की गई है।