2020 दिल्ली दंगे: मोंनिश की हत्या के 5 दोषियों की 7 साल की सजा बरकरार, हाई कोर्ट ने खारिज की अपील

दिल्ली हाई कोर्ट ने 2020 के दंगों में मोंनिश की हत्या के मामले में पांच दोषियों की सात साल की जेल की सजा को बरकरार रखा है।

Kittu Kumari28 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
2020 दिल्ली दंगे: मोंनिश की हत्या के 5 दोषियों की 7 साल की सजा बरकरार, हाई कोर्ट ने खारिज की अपील

साल 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़के दंगों के दौरान हुई एक दर्दनाक हत्या के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने 22 वर्षीय युवक मोंनिश की मौत के जिम्मेदार पांच दोषियों की सात साल की जेल की सजा को बरकरार रखा है। जस्टिस मधु जैन ने इस मामले में दोषियों द्वारा दायर की गई अपीलों को पूरी तरह खारिज कर दिया और निचली अदालत के फैसले पर अपनी मुहर लगा दी।

यह पूरा मामला 25 फरवरी 2020 का है, जब उत्तर-पूर्वी दिल्ली के चांद बाग इलाके में पीर बाबा मजार के पास भारी हिंसा हुई थी। उस दौरान एक हथियारबंद भीड़ ने मोंनिश का पीछा किया और उन पर जानलेवा हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल मोंनिश को गुरु तेग बहादुर अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि सिर पर किसी भारी चीज से प्रहार होने के कारण दिमाग में लगी चोट और सदमे की वजह से उनकी मौत हुई।

गवाहों की गवाही और सबूतों ने दिलाई सजा

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इस मामले में अमन कश्यप, देविंदर कुमार, प्रदीप राय, आशीष (उर्फ गोली) और अरुण कुमार को दोषी ठहराया गया था। बचाव पक्ष ने हाई कोर्ट में दलील दी थी कि गवाहों के बयानों में विसंगतियां हैं, पुलिस रिपोर्ट में देरी हुई और पहचान परेड (TIP) नहीं कराई गई, इसलिए सजा रद्द होनी चाहिए।

हालांकि, हाई कोर्ट ने इन दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने पाया कि कांस्टेबल पीयूष सहित अन्य चश्मदीद गवाहों के बयान पुख्ता थे। सबूतों से यह साफ हो गया कि ये पांचों लोग भीड़ के सबसे आगे थे और न केवल हिंसा में शामिल थे, बल्कि दूसरों को भी उकसा रहे थे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इन आरोपियों की भूमिका केवल भीड़ का हिस्सा होने तक सीमित नहीं थी, बल्कि उन्होंने सक्रिय रूप से अपराध में भाग लिया था।

बता दें कि कड़कड़डूमा कोर्ट ने 30 नवंबर 2024 को इन्हें दोषी करार दिया था और 13 जनवरी 2025 को सजा सुनाई थी। इन सभी को गैर-इरादतन हत्या के लिए सात साल के कठोर कारावास और दंगे में शामिल होने के लिए एक साल के साधारण कारावास की सजा मिली थी। इसके साथ ही प्रत्येक दोषी पर 30,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था।

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