दिल्ली कोर्ट का बड़ा फैसला, 2016 के शिक्षक हत्याकांड में पूर्व छात्र विवेक कुमार को उम्रकैद

दिल्ली की एक अदालत ने 2016 के बहुचर्चित शिक्षक हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाया है। दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने 28 साल के विवेक कुमार को उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह मामला नांगलोई के एक सरकारी स्कूल में पीजीटी शिक्षक मुकेश कुमार की हत्या से जुड़ा है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रिया महेंद्र ने 21 सितंबर 2026 को यह फैसला सुनाया, इससे पहले 8 सितंबर 2026 को आरोपी को दोषी ठहराया गया था। अदालत ने उम्रकैद की सजा के साथ-साथ 60,500 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इस जुर्माने की राशि में से 50,000 रुपये पीड़िता के परिवार को मुआवजे के रूप में दिए जाएंगे। इसके अलावा, अदालत ने पश्चिम जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को भी परिवार को अतिरिक्त मुआवजा देने का निर्देश दिया है। अभियोजन पक्ष ने इस मामले में मौत की सजा यानी फांसी की मांग की थी। अभियोजन पक्ष का कहना था कि यह अपराध पहले से योजना बनाकर किया गया था और यह गुरु-शिष्य के पवित्र रिश्ते पर हमला था। सरकारी वकीलों ने तर्क दिया कि आरोपी ने हत्या के बाद कोई पछतावा नहीं दिखाया, वह अंतरिम जमानत पर रहते हुए एक अन्य हत्या के मामले में भी शामिल था और जेल में भी अन्य कैदियों के साथ मारपीट जैसी अनुशासनहीनता की थी। दूसरी ओर, बचाव पक्ष के वकील ने आरोपी की कम उम्र का हवाला देते हुए मौत की सजा का विरोध किया था। न्यायाधीश प्रिया महेंद्र ने इस हत्या को एक जघन्य कृत्य बताया जिससे शिक्षक-छात्र के रिश्ते की सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं को गहरी ठेस पहुंची है। हालांकि, अदालत ने मौत की सजा की मांग को खारिज कर दिया क्योंकि घटना के समय आरोपी की उम्र 18 वर्ष 7 महीने थी। अदालत नेशोद्धात्मक और किशोरावस्था के मस्तिष्क के सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा कि उस समय उसकी मानसिक क्षमता एक वयस्क की तरह पूरी तरह विकसित नहीं मानी जा सकती थी। यह पूरी घटना 26 सितंबर 2016 को हुई थी। स्कूल द्वारा नाम काटे जाने से गुस्साए आरोपी और उसके एक नाबालिग साथी ने कक्षा के अंदर ही शिक्षक मुकेश कुमार पर चाकू से हमला कर दिया था। इस हमले के लिए उन्होंने 100 रुपये में चाकू खरीदा था। इस 2016 की त्रासदी के बाद, दिल्ली सरकार ने मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए थे और मृतक के परिवार को एक करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता देने की घोषणा की थी।