दिल्ली की अदालत ने 700 करोड़ रुपये के मेडिकल खरीद घोटाले में राजीव रंगीला को 4 दिन की एसीबी कस्टडी में भेजा

दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार को डीजीएचएस मेडिकल खरीद घोटाले के मामले में राजीव कुमार उर्फ राजीव अरोड़ा उर्फ राजीव रंगीला को 4 दिन की एंटी-करप्शन ब्रांच (एसीबी) की कस्टडी में भेज दिया है। यह घोटाला 700 करोड़ रुपये का है। रंगीला इस मामले का कथित मास्टरमाइंड है, जो अमेरिका भाग गया था और गिरफ्तारी से बच रहा था। भारत लौटने पर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। उसके खिलाफ लुक आउट सर्कुलर (एलओसी) और गैर-जमानत वारंट (एनबीडब्ल्यू) जारी किए गए थे। एसीबी द्वारा उद्घोषणा की प्रक्रिया भी पूरी की गई थी।
विशेष न्यायाधीश (एसीबी) विद्या प्रकाश ने अपराधों को अंजाम देने के तौर-तरीकों की जांच के लिए राजीव रंगीला की 4 दिन की एसीबी कस्टडी 29 सितंबर तक मंजूर कर ली है। उसे 24 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। एसीबी ने कथित अपराध के संबंध में पूछताछ के लिए रंगीला की 4 दिन की कस्टडी मांगी थी। अदालत ने कहा कि आरोपी के खिलाफ आरोप और पुलिस कस्टडी रिमांड मांगने के लिए दिए गए आधार उचित हैं। विशेष न्यायाधीश ने आदेश में कहा कि अदालत इस बात से संतुष्ट है कि वर्तमान मामले में आरोपी की गिरफ्तारी उचित है, और आरोपी राजीव कुमार उर्फ राजीव अरोड़ा उर्फ राजीव रंगीला की 4 दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड के अनुरोध को स्वीकार करने के लिए पर्याप्त आधार हैं।
अदालत ने नोट किया कि कस्टडी की मांग विभिन्न उद्देश्यों से जांच में सहायता के लिए की गई है। इसमें शामिल अपराधों में इस्तेमाल किए गए तौर-तरीकों का पता लगाना, अपराध में शामिल अन्य लोक सेवकों, निजी व्यक्तियों, निर्माताओं, वितركों, बिचौलियों और संस्थाओं की पहचान स्थापित करना, दस्तावेजी और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य की पहचान कर बरामद करने का प्रयास करना और टेंडर से संबंधित गायब फाइलों को बरामद करना शामिल है। उप निदेशक सतर्कता द्वारा की गई शिकायत में सीआर रेडियो, एथीसिया मशीन, विशेष उपकरण और ओरल डिहाइड्रेशन सॉल्यूशन जैसे मेडिकल उपकरणों की खरीद में अनियमितता के मामलों का उल्लेख किया गया है।
यह भी आरोप लगाया गया है कि इसी तौर-तरीके का उपयोग करके आरोपी ने 448 पोर्टेबल एक्स-रे मशीनें आपूर्ति करने का आर्डर प्राप्त किया, जबकि प्रारंभिक टेंडर केवल 2 मशीनों के लिए था। रंगीला की 4 दिन की कस्टडी मांगते हुए सीनियर पब्लिक प्रोसिक्यूटर कुमार संजय ने प्रस्तुत किया कि आरोपी इस मामले के साजिशकर्ताओं में से एक है और शुरू में फरार था। इसलिए इस मामले में लुक आउट सर्कुलर (एलओसी), एनबीडब्ल्यू और उद्घोषणा जारी की गई थी। उन्होंने तर्क दिया कि खरीद साजिश में उसकी भूमिका स्थापित करने, अपराध में इस्तेमाल तौर-तरीकों का पता लगाने और साक्ष्य बरामद करने के लिए पुलिस कस्टडी की आवश्यकता है।
दूसरी ओर, आरोपी के वकील एडवोकेट विक्रम सिंह पंवार ने कस्टडी की प्रार्थना का विरोध किया। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसी द्वारा जांच लगभग पूरी कर ली गई है और इस मामले में तीन अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट पहले ही दाखिल की जा चुकी है। उन्होंने आगे तर्क दिया कि चार्जशीट दाखिल होने से यह पता चलता है कि मौखिक या दस्तावेजी अधिकांश साक्ष्य पहले ही एकत्र किए जा चुके हैं। इसलिए जांच एजेंसी का 4 दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड का अनुरोध अत्यधिक अनुचित है और जांच एजेंसी द्वारा उचित नहीं ठहराया गया है।