NEET-UG Paper Leak Case: दिल्ली कोर्ट ने आरोपियों के पॉलीग्राफ टेस्ट पर फैसला सुरक्षित रखा

Kittu Kumari6 August 20262 min read46 viewsDelhi Local
NEET-UG Paper Leak Case: दिल्ली कोर्ट ने आरोपियों के पॉलीग्राफ टेस्ट पर फैसला सुरक्षित रखा

दिल्ली की एक स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट ने 6 अगस्त 2026 को NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में तीन आरोपियों द्वारा दायर पॉलीग्राफ, ब्रेन मैपिंग और लाई डिटेक्टर टेस्ट की अर्जी पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है। राउज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज अजय गुप्ता इस अर्जी पर 10 अगस्त को अपना फैसला सुनाएंगे। इस मामले में आरोपी - मांगीलाल बिवाल, दिनेश बिवाल और विकास बिवाल हैं, जिन्हें जयपुर के बिवाल परिवार का सदस्य और कथित मल्टी-स्टेट पेपर लीक नेटवर्क का मुख्य हिस्सा बताया गया है। इन आरोपियों ने पारदर्शी जांच में मदद करने और अपनी नीयत साफ दिखाने के लिए खुद यह अर्जी दी थी।

सीबीआई ने किया अर्जी का विरोध

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की ओर से पेश हुए सीनियर पब्लिक प्रोसिक्यूटर वी के पाठक और पब्लिक प्रोसिक्यूटर अर्जुन आनंद ने इस याचिका का विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि यह याचिका सुनवाई योग्य नहीं है और आरोपियों पर जुर्माना लगाया जाना चाहिए। आरोपियों की तरफ से एडवोकेट ए पी सिंह पेश हुए। कोर्ट ने कहा कि वह विचारणीय पहलू की जांच करेगी और दिन-प्रतिदिन की कार्यवाही सुनिश्चित करेगी। इससे पहले कोर्ट ने सीबीआई को निर्देश दिया था कि वह 6 अगस्त तक सभी आरोपियों को NEET-UG 2026 पेपर लीक की चार्जशीट उपलब्ध कराए।

चार्जशीट और परीक्षा से जुड़ी अन्य जानकारियां

मामले की आगे की कार्यवाही के तहत दिनेश बिवाल और विकास बिवाल की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई 6 अगस्त तक के लिए टाल दी गई थी। इसके अलावा सीबीआई की चार्जशीट पर संज्ञान लेने से जुड़ा मामला भी जांच के लिए 6 अगस्त तक स्थगित कर दिया गया था। NEET-UG 2026 परीक्षा मूल रूप से 3 मई 2026 को आयोजित की गई थी, जिसे पेपर लीक के आरोपों के बाद 12 मई 2026 को रद्द कर दिया गया था। इसके बाद 21 जून 2026 को दोबारा परीक्षा आयोजित की गई। सीबीआई ने 12 मई 2026 को एफआईआर दर्ज की थी और तब से लेकर अब तक 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, जो सभी वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं। अलग से, भारत के सुप्रीम कोर्ट ने NEET UG 2026 पेपर लीक से जुड़े एक अन्य मामले की सुनवाई 19 अगस्त तक के लिए टाल दी है, जिससे याचिकाकर्ताओं को केंद्र के हलफनामे पर जवाब देने की अनुमति मिल गई है।

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