MCOCA आरोपियों की गिरफ्तारी में 6 साल की देरी, दिल्ली कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को बुरी तरह फटकारा

Kittu Kumari7 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
MCOCA आरोपियों की गिरफ्तारी में 6 साल की देरी, दिल्ली कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को बुरी तरह फटकारा

दिल्ली की एक विशेष अदालत ने संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (MCOCA) के आरोपियों को पकड़ने में भारी लापरवाही बरतने पर दिल्ली पुलिस की जमकर क्लास लगाई है। राउज एवेन्यू कॉम्प्लेक्स की कोर्ट ने इस बात पर गहरा आश्चर्य और नाराजगी जताई कि पुलिस को दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार करने में छह साल का समय क्यों लगा। जज ने पुलिस के उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि आरोपियों को पकड़ने के लिए 'हर संभव कोशिश' की गई थी।

विशेष न्यायाधीश गौरव राव ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि पुलिस का यह दावा महज एक मजाक है और उनकी कार्रवाई पूरी तरह से सतही और केवल एक औपचारिकता बनकर रह गई। यह पूरा मामला मुकेश उर्फ पुनीत और प्रदीप उर्फ गुरी नाम के आरोपियों से जुड़ा है। मुकेश के खिलाफ सितंबर 2020 में ही MCOCA के तहत मामला दर्ज कर लिया गया था, उस समय वह पहले से ही हत्या और हत्या के प्रयास सहित करीब 20 एफआईआर में नामजद था। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतने सख्त कानून के बावजूद वह फरवरी 2026 तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर रहा।

लापरवाही की हद: फरार रहते हुए किए कई और अपराध

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कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इस बात पर चिंता जताई कि जब पुलिस मुकेश को ढूंढ रही थी, उसी दौरान 2021 से 2024 के बीच उसने आठ और गंभीर अपराध किए, जिनमें हत्या, लूट और अपहरण जैसे मामले शामिल हैं। प्रदीप को भी काफी देरी से अप्रैल 2026 में गिरफ्तार किया गया, जबकि गैंग के तीन अन्य सदस्य अब भी फरार हैं। कोर्ट का मानना है कि ऐसी देरी MCOCA जैसे कड़े कानून के मूल उद्देश्य को ही खत्म कर देती है।

अदालत ने इस मामले में जांच का जिम्मा संभालने वाले एसीपी राकेश कुमार, एसीपी एसके गौर, रिटायर्ड एसीपी विपिन कुमार और एडिशनल डीसीपी लोकेश्वरन, रविनंदन बीएम और ऋषि कुमार की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को आदेश दिया है कि इस पूरी लापरवाही की गहन जांच की जाए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

इसके अलावा, कोर्ट ने यह भी जानना चाहा कि जिस समय MCOCA लागू था, क्या आरोपी मुकेश किसी अन्य मामले में न्यायिक हिरासत में था या जमानत पर बाहर था। मामले की गंभीरता को देखते हुए जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस को 13 अक्टूबर 2026 को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने और विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।

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