दिल्ली कोर्ट का बड़ा आदेश: प्रोटेस्ट में पुलिस ज्यादती के आरोपों के बीच CCTV फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश

दिल्ली की एक अदालत ने 20 जुलाई 2026 को हुए प्रोटेस्ट के दौरान कथित ज्यादती से जुड़ी CCTV फुटेज को सुरक्षित रखने के लिए पुलिस को निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही अदालत ने पुलिस से कंप्लायंस रिपोर्ट मांगी है और याचिकाकर्ता से स्पष्टीकरण मांगा है। इस मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को तय की गई है। यह पूरा मामला 20 जुलाई के प्रोटेस्ट और उससे जुड़े पुलिस एक्शन से संबंधित है।
पटियाला हाउस कोर्ट का आदेश और FIR की मांग
पटियाला हाउस कोर्ट ने संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के SHO को 18 अगस्त तक कंप्लायंस रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है। यह आदेश एक याचिका के बाद आया है जिसमें 20 जुलाई को निहत्थे छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग करने का आरोप लगाते हुए सीनियर दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की गई थी। इसके विपरीत, दिल्ली पुलिस ने प्रोटेस्ट के दौरान 130 पुलिसकर्मियों और 65 छात्रों के घायल होने की जानकारी दी और 15 FIR दर्ज की हैं। अलग से, दिल्ली हाईकोर्ट ने पहले ही 22 जुलाई 2026 को केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को सभी संबंधित CCTV और बॉडी कैमरा फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश जारी किए थे, और उस मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर के लिए तय है।
पार्लियामेंट हाउस के पास विरोध प्रदर्शन और पुलिस के दावे
20 जुलाई के प्रोटेस्ट में प्रदर्शनकारी पार्लियामेंट हाउस से 50-100 मीटर की दूरी तक पहुंच गए थे, जिससे विवाद पैदा हुआ। राहुल गांधी जैसी हस्तियों ने पुलिस पर बर्बरता का आरोप लगाया है। हालांकि अदालत ने अभी पुलिस के खिलाफ FIR का आदेश नहीं दिया है, लेकिन उसने अहम सबूतों को सुरक्षित रखने पर जोर दिया है। दिल्ली पुलिस, जिसने 19 जुलाई 2026 को भारतीय न्याय संहिता की धारा 163 (पूर्व में CrPC धारा 144) के तहत अनधिकृत प्रदर्शनों पर रोक लगाने वाली एडवाइजरी जारी की थी, ने 29 जुलाई 2026 को एक फैक्ट-चेक भी किया और एक प्रदर्शनकारी को गोली लगने के दावों का खंडन किया। उन्होंने आगे बताया कि प्रोटेस्ट के दौरान फेस रिकग्निशन सिस्टम का उपयोग करके क्रिमिनल बैकग्राउंड वाले 2,000 से अधिक व्यक्तियों की पहचान की गई थी।