दिल्ली अदालत ने एनआईए जांच के बीच सात विदेशी नागरिकों को स्वदेश लौटने की दी अनुमति

दिल्ली की एक अदालत ने सात विदेशी नागरिकों को उनके गृह देश अमेरिका और यूक्रेन लौटने की अनुमति दे दी है। इन सभी को एनआईए जांच के मामले में पहले गिरफ्तार किया गया था। राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष एनआईए जज प्रशांत शर्मा ने 24 सितंबर 2026 को यह आदेश जारी किया। अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत विदेश यात्रा के अधिकार को मौलिक अधिकारों का विस्तार बताया। अनुमति पाने वालों में अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिक विक्टर कामिस्की, पेट्रो हुरबा, तारास स्लीवियाक, इवान सुकमनोवस्की, मारियन स्टेफानकिव और माक्सिम गोंचारुक शामिल हैं। अदालत के आदेश के बाद 24 सितंबर 2026 को इन सातों को तिहाड़ जेल से रिहा कर दिया गया।
गिरफ्तारी और एनआईए की जांच
इन लोगों को मार्च 2026 में आतंकवादी गतिविधियों की साजिश रचने और ड्रोन युद्ध का प्रशिक्षण लेने के आरोपों के बीच गिरफ्तार किया गया था। एनआईए गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम यानी यूएपीए के तहत मामले की जांच जारी रखे हुए है। हालांकि, एजेंसी ने अदालत को सूचित किया कि फिलहाल आरोपियों की शारीरिक उपस्थिति आवश्यक नहीं है। एनआईए ने यह भी कहा कि वह यूएपीए के आरोपों को लेकर बाद में पूरक चार्जशीट दाखिल कर सकती है। इससे पहले 8 सितंबर 2026 को एनआईए ने इमीग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट 2025 के उल्लंघन पर अपनी पहली चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बाद आरोपियों ने फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस को 5.5 लाख रुपये प्रति व्यक्ति का जुर्माना चुकाकर उस अधिनियम की धाराओं से मुक्ति पा ली थी।
यात्रा के लिए अदालत की शर्तें
अदालत ने यात्रा के लिए कई शर्तें तय की हैं और इन व्यक्तियों को अपने परिवार से मिलने के लिए एक महीने का समय दिया है। इन्हें इस अवधि के समाप्त होने पर भारत वापस लौटना होगा और वापसी के 72 घंटे के भीतर अदालत को सूचित करना होगा। इसके अलावा, उन्हें 24 घंटे के भीतर एनआईए को अपने पते, काम करने वाले मोबाइल नंबर और ईमेल पते देने होंगे। अदालत ने यह भी आदेश दिया कि जब भी समन भेजा जाए, आरोपियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग या व्यक्तिगत रूप से चल रही एनआईए जांच में शामिल होना होगा।