दिल्ली कोर्ट ने अमेरिकी और छह यूक्रेनी नागरिकों को विदेश जाने की दी अनुमति, जानिए पूरा मामला

Kittu Kumari27 September 20262 min read1 viewDelhi Local
दिल्ली कोर्ट ने अमेरिकी और छह यूक्रेनी नागरिकों को विदेश जाने की दी अनुमति, जानिए पूरा मामला

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने गुरुवार, 24 सितंबर 2026 को एक बड़ा फैसला लेते हुए अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को अपने गृह देश जाने की अनुमति दे दी है। यह अनुमति एक महीने की अवधि के लिए दी गई है। ये सभी लोग म्यांमार ट्रेनिंग कैंप से जुड़े एक मामले में तिहाड़ जेल से डिफ़ॉल्ट जमानत मिलने के बाद 25 सितंबर 2026 को रिहा हुए थे। जिन छह यूक्रेनी नागरिकों को अनुमति मिली है, उनकी पहचान हर्बा पेट्रो, स्लीवियाक तारास, इवान सुकमनोव्स्की, स्टेफांकिव मारियान, गोनचारुक माक्सिम और कामिन्स्की विक्टर के रूप में हुई है।

मामले की पृष्ठभूमि और आरोप

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने शुरू में इन पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत ड्रोन युद्ध और प्रशिक्षण में शामिल होने का आरोप लगाया था। लेकिन 8 सितंबर 2026 को दाखिल चार्जशीट में केवल अप्रवासन और विदेशी अधिनियम, 2025 की धारा 21 और 23 ही लगाई गईं। ये धाराएं वीजा उल्लंघन और अवैध प्रवेश से जुड़ी हैं। विशेष एनआईए जज प्रशांत शर्मा ने कहा कि एनआईए की चार्जशीट अधूरी थी और 180 दिनों के भीतर आतंकी आरोपों की जांच पूरी न होने के कारण कोर्ट ने डिफ़ॉल्ट जमानत दे दी।

जुर्माना और यात्रा की शर्तें

इस मामले के समाधान के रूप में, विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) ने अप्रवासन अपराधों का निपटारा किया, जिसके तहत प्रत्येक व्यक्ति को साढ़े पांच लाख रुपये का जुर्माना देना होगा। कोर्ट ने यात्रा आसान बनाने के लिए उनके पासपोर्ट भी जारी करने का आदेश दिया। जज ने इस बात पर जोर दिया कि विदेश यात्रा का अधिकार भारतीय संविधान के तहत मौलिक अधिकारों का ही विस्तार है। विदेश जाने के लिए कुछ सख्त शर्तें भी तय की गई हैं। इन लोगों को अपने देश पहुंचने के 24 घंटे के भीतर एनआईए को अपना आवासीय पता, चालू मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी देनी होगी। साथ ही, उन्हें आगे की जांच के लिए एनआईए के सामने उपलब्ध रहना होगा और एक महीने की अवधि समाप्त होने के बाद वापस भारत लौटना होगा। इस मामले में बचाव पक्ष की कानूनी टीम में अधिवक्ता रोहित डंडियाल, रोहित गौड़ और नितिन सलूजा शामिल थे। इस बीच, कांग्रेस पार्टी ने सरकार के इस फैसले की आलोचना करते हुए आरोप लगाया है कि यह कदम अमेरिका के कूटनीतिक दबाव के कारण उठाया गया है।

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