9.90 करोड़ के सोने की तस्करी मामला: दिल्ली कोर्ट ने 8 आरोपियों को दी जमानत, सबूतों पर उठाए सवाल

Kittu Kumari6 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
9.90 करोड़ के सोने की तस्करी मामला: दिल्ली कोर्ट ने 8 आरोपियों को दी जमानत, सबूतों पर उठाए सवाल

दिल्ली की एक अदालत ने करीब 9.90 करोड़ रुपये की कीमत वाली सोने की चेन की तस्करी के मामले में आठ आरोपियों को बड़ी राहत दी है। चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट मृदुल गुप्ता ने शनिवार को इन आठों आरोपियों की जमानत अर्जी मंजूर कर ली। कोर्ट ने अपने फैसले में यह साफ किया कि इस स्तर पर किसी भी आरोपी के पास से व्यक्तिगत रूप से सोना बरामद नहीं हुआ है और न ही ऐसा कोई स्वतंत्र सबूत मिला है जो उन्हें सीधे तौर पर इस तस्करी से जोड़ता हो।

पूरा मामला तब शुरू हुआ जब कस्टम विभाग ने दावा किया कि 21 सितंबर को दुबई से आईजीआई एयरपोर्ट पहुंचे कुछ लोगों ने 'ग्रीन चैनल' पार करने के बाद तस्करी की कोशिश की। विभाग के मुताबिक, विमान से 6.495 किलोग्राम वजन की 23 सोने की चेन बरामद हुई थीं, जिनकी कीमत लगभग 9.90 करोड़ रुपये आंकी गई। कस्टम विभाग का आरोप था कि दुबई में सुरक्षा क्षेत्र से पहले इन चेन को आरोपियों के बीच बांटा गया था और बाद में उन्हें वापस इकट्ठा कर लिया गया। विभाग ने यह भी दावा किया कि आरोपियों ने पूछताछ के दौरान इस बात को स्वीकार किया है।

बचाव पक्ष ने लगाया प्रताड़ना का आरोप

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अदालत में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों ने कस्टम विभाग की कहानी को सिरे से खारिज कर दिया। वकील प्रदीप राणा और अन्य काउंसिल ने दलील दी कि उनके मुवक्किलों को औपचारिक गिरफ्तारी से पहले ही अवैध रूप से हिरासत में रखा गया था। इतना ही नहीं, यह आरोप भी लगाया गया कि हिरासत के दौरान आरोपियों के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया और उन्हें शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया, जिसका प्रमाण मेडिकल रिपोर्ट में मौजूद चोटों और सूजन से मिलता है।

बचाव पक्ष ने कोर्ट को बताया कि कस्टम एक्ट की धारा 108 के तहत दर्ज कराए गए बयान दबाव में लिए गए थे और आरोपियों से पहले से लिखे हुए कागजों पर हस्ताक्षर करवाए गए। उन्होंने जोर देकर कहा कि दुबई की यात्रा पूरी तरह वैध थी और किसी भी आरोपी के सामान या घर की तलाशी में कोई भी आपत्तिजनक चीज नहीं मिली है।

कोर्ट ने पाया कि मुख्य सबूत (सोना) पहले ही जब्त किया जा चुका है और आरोपियों के पासपोर्ट व मोबाइल फोन भी विभाग के पास हैं, इसलिए सबूतों के साथ छेड़छाड़ की कोई संभावना नहीं है। अदालत ने यह भी गौर किया कि दुबई में सोने के लेनदेन को साबित करने के लिए कोई सीसीटीवी फुटेज या एयरलाइन कर्मियों के बयान पेश नहीं किए गए हैं, जिसके आधार पर जमानत देने का फैसला किया गया।

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