CDSCO भ्रष्टाचार मामला: दिल्ली कोर्ट ने पूर्व अधिकारी एस ईश्वरा रेड्डी समेत 4 आरोपियों को किया डिस्चार्ज
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने CDSCO के पूर्व अधिकारी एस ईश्वरा रेड्डी और तीन अन्य को भ्रष्टाचार के मामले में बरी कर दिया है।

दिल्ली की एक विशेष अदालत ने सीबीआई द्वारा दर्ज भ्रष्टाचार के एक मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने CDSCO के पूर्व अधिकारी डॉ. एस ईश्वरा रेड्डी और तीन अन्य आरोपियों को इस मामले से मुक्त (डिस्चार्ज) कर दिया है। अदालत का मानना है कि सीबीआई द्वारा पेश किए गए सबूतों और दस्तावेजों से आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस मामला नहीं बनता है।
राउज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज विशाल पाहुजा ने 31 अक्टूबर को अपना विस्तृत आदेश सुनाया। कोर्ट ने डॉ. एस ईश्वरा रेड्डी के साथ-साथ अनिमेष कुमार, गुलजीत सेठी (उर्फ गुलजीत चौधरी) और प्रवीण कुमार लक्ष्मीनारायण (उर्फ एल. प्रवीण कुमार) को बरी किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि सीबीआई के आरोपों में वह गंभीरता नहीं दिखी, जो किसी व्यक्ति पर आपराधिक मुकदमा चलाने के लिए जरूरी होती है।
सबूतों की कमी और कॉल रिकॉर्डिंग पर सवाल
अदालत ने अपने फैसले में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर गौर किया। कोर्ट ने पाया कि डॉ. ईश्वरा रेड्डी के खिलाफ रिश्वत मांगने या लेने के आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त सामग्री उपलब्ध नहीं थी। इसके अलावा, सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी की सिफारिशों में कथित बदलावों को लेकर भी कोई अवैधता साबित नहीं हुई।
सबसे अहम बात यह रही कि सीबीआई ने सबूत के तौर पर जिन कॉल रिकॉर्डिंग्स का इस्तेमाल किया था, उन्हें कोर्ट ने स्वीकार करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम और उसके नियमों का उल्लंघन होने के कारण इन रिकॉर्डिंग्स को सबूत नहीं माना जा सकता।
अन्य आरोपियों की बात करें तो अनिमेष कुमार के खिलाफ 30,000 रुपये के भुगतान का आरोप था, लेकिन चार्जशीट में न तो तारीख थी और न ही जगह का जिक्र। वहीं, गुलजीत सेठी और प्रवीण कुमार के खिलाफ भी आपराधिक साजिश साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं मिले। कोर्ट ने अंत में यह टिप्पणी की कि केवल संदेह के आधार पर किसी को ट्रायल पर नहीं खड़ा किया जा सकता, उसके लिए 'गंभीर संदेह' का होना जरूरी है, जो इस मामले में नजर नहीं आया।