842 करोड़ का स्वास्थ्य घोटाला: दिल्ली कोर्ट ने नीरज चोपड़ा की जमानत याचिका खारिज की
दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने 842 करोड़ रुपये के स्वास्थ्य खरीद घोटाले में नीरज चोपड़ा की जमानत याचिका खारिज कर दी है।

दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े एक बड़े भ्रष्टाचार मामले में कड़ा रुख अपनाया है। स्पेशल जज विद्या प्रकाश ने सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (CPA) के पूर्व डिप्टी कंट्रोलर ऑफ अकाउंट्स नीरज चोपड़ा की नियमित जमानत याचिका को नामंजूर कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस तरह के आर्थिक अपराध न केवल सरकारी खजाने को नुकसान पहुँचाते हैं, बल्कि समाज और स्वास्थ्य व्यवस्था पर गहरा नकारात्मक प्रभाव डालते हैं, इसलिए इन्हें सामान्य अपराधों से अलग श्रेणी में रखा जाना चाहिए।
यह पूरा मामला दिल्ली के एंटी-करप्शन ब्रांच (ACB) की जांच के दायरे में है, जिसमें करीब 842 करोड़ रुपये के सार्वजनिक धन की हेराफेरी का आरोप है। जांच एजेंसी का दावा है कि इस घोटाले के पीछे एक बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था, जिसमें पूर्व CPA प्रमुख डॉ. विनोद कुमार रंगा, स्वास्थ्य सेवाओं की पूर्व महानिदेशक डॉ. वत्सला अग्रवाल और फार्मास्युटिकल व्यापारी राजीव रंगीला शामिल थे। राजीव रंगीला को इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड माना जा रहा है। इस मामले में F-Med डिवाइसेज और एम साहिब एंड संस प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है।
टेंडर में धांधली और करोड़ों की लूट का खेल
ACB की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। आरोप है कि सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) की अनिवार्य प्रक्रिया को दरकिनार कर जानबूझकर मैनुअल खरीद आदेश जारी किए गए ताकि टेंडरों में हेराफेरी की जा सके। भ्रष्टाचार का आलम यह था कि 14.9 लाख रुपये की कीमत वाली एक्स-रे मशीनें करीब 37.8 लाख रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से खरीदी गईं।
इतना ही नहीं, जांच में सामने आया है कि 25 करोड़ रुपये की कीमत वाली बेडशीट और लिनन के लिए 75 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। वहीं, महज 1.25 करोड़ रुपये मूल्य के ORS पाउच की खरीद पर 7.5 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए। जांच अधिकारियों का यह भी आरोप है कि दवाओं की खरीद में करीब 300 करोड़ रुपये की रिश्वत (किकबैक) दी गई। मामले को और उलझाने के लिए 10 महत्वपूर्ण खरीद फाइलें भी गायब कर दी गईं।
इस मामले में 16 सितंबर 2026 को चार्जशीट दाखिल की गई थी, जिसमें 123 दस्तावेज और 84 गवाहों के बयान शामिल हैं। इससे पहले 17 अक्टूबर 2026 को कोर्ट डॉ. रंगा और डॉ. अग्रवाल की जमानत याचिकाएं भी खारिज कर चुका है। अदालत का मानना है कि यदि आरोपियों को इस स्तर पर रिहा किया गया, तो वे गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं या जांच में बाधा डाल सकते हैं।