840 करोड़ का मेडिकल घोटाला: मास्टरमाइंड राजीव रंगीला की जमानत याचिका कोर्ट ने की खारिज

दिल्ली कोर्ट ने 840 करोड़ रुपये के मेडिकल प्रोक्योरमेंट घोटाले के मास्टरमाइंड राजीव रंगीला की जमानत याचिका खारिज कर दी है।

Kittu Kumari4 November 20262 min read0 viewsDelhi Local
840 करोड़ का मेडिकल घोटाला: मास्टरमाइंड राजीव रंगीला की जमानत याचिका कोर्ट ने की खारिज

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने 840 करोड़ रुपये के कथित मेडिकल प्रोक्योरमेंट घोटाले में मुख्य आरोपी राजीव कुमार, जिसे राजीव रंगीला के नाम से भी जाना जाता है, की जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। एंटी-करप्शन ब्रांच (ACB) ने रंगीला को इस पूरे भ्रष्टाचार मामले का मास्टरमाइंड बताया है। बुधवार, 4 नवंबर 2026 को विशेष न्यायाधीश विद्या प्रकाश ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए आरोपी का हिरासत में रहना जरूरी है।

कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में इस बात पर जोर दिया कि आरोपी द्वारा सबूतों को मिटाए जाने की पूरी संभावना है। विशेष रूप से, निर्माताओं के प्रतिनिधियों के साथ व्हाट्सएप पर हुई बातचीत जैसे डिजिटल सबूतों को नष्ट किए जाने का खतरा जताया गया है। जांच एजेंसी का मानना है कि बाहर आने पर वह गवाहों और सबूतों को प्रभावित कर सकता है।

टेंडर में हेराफेरी और कीमतों में भारी बढ़ोतरी

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इस पूरे मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जांच में टेंडरों के साथ बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ के आरोप लगे हैं। ACB के अनुसार, मेडिकल सामानों की खरीद के लिए जानबूझकर ऐसी शर्तें (स्पेसिफिकेशन) बनाई गईं जिससे कीमतें बढ़ जाएं। एक चौंकाने वाले उदाहरण में यह सामने आया कि पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों की बाजार कीमत महज 14.92 लाख रुपये थी, लेकिन उन्हें 38 लाख रुपये की भारी कीमत पर खरीदा गया।

राजीव रंगीला कथित तौर पर 'F-Med डिवाइसेस' और 'M साहिब एंड संस प्राइवेट लिमिटेड' जैसी फर्मों के जरिए यह खेल खेल रहा था। न्यायिक दस्तावेजों के मुताबिक, रंगीला का कानूनी इतिहास भी विवादित रहा है, जिसमें उसका अमेरिका भाग जाना और उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी होना शामिल है।

यह घोटाला स्वास्थ्य महानिदेशालय (DGHS) और केंद्रीय खरीद एजेंसी (CPA) से जुड़ा है। इस मामले में केवल रंगीला ही नहीं, बल्कि कई बड़े अधिकारी भी फंसे हैं। पूर्व महानिदेशक डॉ. वत्सला अग्रवाल, पूर्व CPA प्रमुख डॉ. विनोद कुमार रंगा और पूर्व डिप्टी कंट्रोलर नीरज चोपड़ा की जमानत याचिकाएं भी पहले ही खारिज की जा चुकी हैं। फिलहाल कोर्ट आरोपी के वित्तीय लेनदेन और सरकारी अधिकारियों पर उसके प्रभाव की गहन जांच पर नजर रखे हुए है।

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