यौन शोषण मामला: दिल्ली कोर्ट ने पूर्व शिक्षक की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की

दिल्ली की एक अदालत ने यौन शोषण के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे एक पूर्व शिक्षक को बड़ी राहत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि मामले में लगे आरोप बेहद गंभीर हैं, जिनमें डराने-धमकाने और आपत्तिजनक वीडियो प्रसारित करने जैसी बातें शामिल हैं। यह फैसला पीड़ित पर डाले गए मानसिक दबाव और आरोपी के प्रभाव को देखते हुए लिया गया है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गोमती मनोचा ने 12 अक्टूबर 2026 को यह आदेश जारी किया। अदालत ने अपने अवलोकन में कहा कि जब यह घटना शुरू हुई थी, तब शिकायतकर्ता की उम्र 18 वर्ष से कम थी। चूंकि आरोपी एक शिक्षक था और उसका शिकायतकर्ता पर अधिकार था, इसलिए इस रिश्ते में सहमति की बात संदिग्ध लगती है। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि सत्ता और पद का दुरुपयोग कर किसी को प्रभावित करना एक गंभीर अपराध है।
ब्लैकमेलिंग और मानसिक प्रताड़ना के लगे आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि आरोपी ने उसकी सहमति के बिना आपत्तिजनक वीडियो रिकॉर्ड किए और बाद में उन्हीं वीडियो का इस्तेमाल उसे डराने और मजबूर करने के लिए किया। अदालत ने मामले में पेश किए गए इलेक्ट्रॉनिक सबूतों, विशेष रूप से व्हाट्सएप चैट का विश्लेषण किया। कोर्ट ने पाया कि इन संदेशों से यह साफ जाहिर होता है कि यह रिश्ता आपसी सहमति पर नहीं, बल्कि निरंतर खतरों और मानसिक तनाव पर आधारित था।
जज मनोचा ने अपने फैसले में कहा कि न्यायिक प्रक्रिया के इस स्तर पर, इस यौन संबंध को पूरी तरह से स्वैच्छिक नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि इस मामले में पावर डायनामिक्स (शक्ति संतुलन) और अधिकार के दुरुपयोग की गहन जांच की आवश्यकता है, जिसके कारण अग्रिम जमानत देना उचित नहीं होगा।