MP चंद्रशेखर आजाद केस: दिल्ली कोर्ट ने पुलिस को 23 अक्टूबर तक जांच पूरी करने का दिया आदेश

नगीना सांसद और भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों वाले मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिया है कि इस मामले की पूरी जांच अगली सुनवाई यानी 23 अक्टूबर तक हर हाल में पूरी कर ली जाए।
यह आदेश एडिशनल चीफ जुडिशियल मजिस्ट्रेट (ACJM) नेहा मित्तल ने दिया है। दरअसल, दिल्ली पुलिस ने जांच पूरी करने के लिए अदालत से दो से तीन महीने के अतिरिक्त समय की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने इस अनुरोध को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने साफ किया कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए समय की मांग जायज नहीं है।
कानूनी प्रावधानों पर कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173(3) के इस्तेमाल पर भी अपनी राय रखी। मजिस्ट्रेट ने स्पष्ट किया कि यह धारा इस मामले में लागू नहीं होती, क्योंकि इसमें लगाए गए आरोप ऐसे हैं जिनमें आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। कानून के मुताबिक, प्रारंभिक जांच केवल उन अपराधों के लिए की जा सकती है जिनमें सजा तीन साल से अधिक लेकिन सात साल से कम हो, जबकि इस केस में आरोप कहीं अधिक गंभीर हैं।
यह पूरा विवाद एक महिला द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत से शुरू हुआ था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि आजाद ने शादी का झांसा देकर उन्हें धोखा दिया और उनका यौन उत्पीड़न किया। जब दिल्ली पुलिस ने शुरुआत में एफआईआर दर्ज नहीं की, तब पीड़िता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
कोर्ट में पीड़िता की पैरवी कर रहे वकील आशीष दास ने पुलिस द्वारा समय मांगे जाने का कड़ा विरोध किया। अब अदालत ने आईजीआई एयरपोर्ट के डीसीपी को निर्देश दिया है कि वे व्यक्तिगत रूप से यह सुनिश्चित करें कि तय समय सीमा के भीतर जांच पूरी हो जाए।