दिल्ली कोर्ट ने सीबीआई नियमों के उल्लंघन पर मदर डेयरी अधिकारी संजय शर्मा को किया बरी

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने भ्रष्टाचार के एक मामले में मदर डेयरी के अधिकारी संजय शर्मा को बरी कर दिया है। अदालत ने यह फैसला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) मैनुअल के नियमों का पालन न करने के कारण सुनाया है। विशेष सीबीआई जज विजेता सिंह रावत ने 22 सितंबर 2026 को यह फैसला देते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ अपना मामला संदेह से परे साबित करने में असफल रहा है। इस मामले में मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं: मदर डेयरी अधिकारी संजय शर्मा भ्रष्टाचार के मामले से बरी, अदालत ने सीबीआई मैनुअल के नियमों के उल्लंघन का दिया हवाला, और अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने में विफल रहा।
मामले की पूरी पृष्ठभूमि और आरोप
मदर डेयरी के दक्षिण जोन के जोनल इंचार्ज के रूप में काम करने वाले संजय शर्मा पर साल 2024 में एक दूध वितरक से डिस्ट्रीब्यूटरशिप रद्द न करने की एवज में 60,000 रुपये की घूस मांगने और बाद में 45,000 रुपये में तय करने का आरोप लगाया गया था। हालांकि, अदालत ने पाया कि जांच एजेंसी ने सीबीआई (क्राइम) मैनुअल 2020 में तय किए गए जरूरी प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया था। अदालत ने विशेष रूप से नियम 9.9, 9.17, 9.21, 11.15 और 12.25 के उल्लंघन को रेखांकित किया है। इसके अलावा, अदालत ने यह भी पाया कि नियम 6.12 की अनदेखी की गई, जिसके तहत शिकायत दर्ज करने और रजिस्ट्रेशन नंबर देने के लिए सक्षम प्राधिकारी से अनुमति लेनी होती है (स्रोत लिंक)।
जांच अधिकारी की कमियां और कोर्ट का फैसला
जज विजेता सिंह रावत ने जांच अधिकारी की कई अन्य कमियों को भी उजागर किया। इसमें सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस के उस आदेश को शामिल न करना शामिल है जो जांच के लिए अधिकृत करता है। इसके साथ ही, वेरिफिकेशन और ट्रैप की कार्रवाई के दौरान इस्तेमाल किए गए वाहनों के रजिस्ट्रेशन नंबर और ड्राइवरों की पहचान दर्ज न करने तथा शिकायतकर्ता द्वारा बोली जाने वाली भाषा को रिकॉर्ड न करने जैसी खामियां भी सामने आईं। इन सभी कमियों और नियमों की अनदेखी के चलते संजय शर्मा को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 के तहत लगाए गए आरोपों से पूरी तरह बरी कर दिया गया है।