नई दिल्ली में राउज एवेन्यू कोर्ट ने हाल ही में सीबीआई मैनुअल के नियमों का पालन न करने पर मदर डेयरी के एक अधिकारी संजय शर्मा को भ्रष्टाचार के मामले में बरी कर दिया है। अदालत ने आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए 22 सितंबर को बरी किया। विशेष सीबीआई जज विजेता सिंह रावत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ अपना मामला संदेह से परे साबित करने में विफल रहा है। इसलिए आरोपी को पी.सी. एक्ट, 1988 की धारा 7 के तहत दंडनीय अपराध से बरी किया जाता है।
विशेष जज ने फैसले में कहा कि सीबीआई क्राइम मैनुअल और विशेष रूप से नियम 9.9, 9.17, 9.21, 11.15 और 12.25 की अनदेखी की गई है। जांच अधिकारी ने पुलिस अधीक्षक का वह आदेश दर्ज नहीं किया जिसके माध्यम से जांच उन्हें सौंपी गई थी। इसके अलावा सत्यापन और ट्रैप कार्रवाई के दौरान इस्तेमाल किए गए वाहनों और उनके चालकों के पंजीकरण नंबर को नोट नहीं किया गया और शिकायतकर्ता की भाषा भी दर्ज नहीं की गई।
अदालत ने कहा कि चूंकि अभियोजन पक्ष का मामला एक विशिष्ट शिकायत पर था और यह मामला ऐसा नहीं है कि ट्रैप किसी लोक सेवक द्वारा संभावित मांग की आशंका में लगाया गया हो। इस तथ्य के कारण कि शिकायत पर सत्यापन के लिए इसे चिह्नित करने वाले पुलिस अधीक्षक का कोई पृष्ठांकन नहीं है और शिकायत को कोई पंजीकरण संख्या नहीं दी गई है, यह एक ऐसी परिस्थिति है जो बचाव पक्ष के इस दावे को बल देती है कि साक्ष्यों से छेड़छाड़ की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।
27 दिसंबर 2024 को मदर डेयरी फ्रूट एंड वेजिटेबल (प्रा.) लिमिटेड के दूध वितरक फिरोज मलिक ने एक शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि मदर डेयरी के जोनल इंचार्ज आरोपी संजय शर्मा ने 1 दिसंबर 2024 से प्रभावी दूध योजना के तहत आपूर्ति किए जा रहे अतिरिक्त दूध पैकेट की बिक्री आय से 60,000 रुपये की रिश्वत की मांग की थी। ऐसा न करने पर उन्होंने शिकायतकर्ता की डिस्ट्रीब्यूटरशिप रद्द करने की धमकी दी थी। आरोपी की ओर से अधिवक्ता संजय गुप्ता और राज कमल आर्य पेश हुए। यह प्रस्तुत किया गया था कि शिकायतकर्ता को आरोपी के खिलाफ रंजिश थी क्योंकि आरोपी ने अमूल दूध की बिक्री पर नकेल कसी थी और मदर डेयरी के दूध की बिक्री बढ़ाने का दबाव डाला था।