दिल्ली कोर्ट ने रेप मामले में आरोपी व्यक्ति को किया बरी, FIR में देरी और होटल रिकॉर्ड बना आधार

दिल्ली की एक अदालत ने रेप, नशीला पदार्थ देने, फिरौती, और सबूत नष्ट करने के आरोपों से एक व्यक्ति को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष संदेह से परे अपना मामला साबित करने में असफल रहा। द्वारका कोर्ट्स के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुशील अनुज त्यागी ने शिकायतकर्ता के बयान, होटल रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन, कॉल-डिटेल रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच के बाद यह फैसला सुनाया। मामले की शुरुआत अक्टूबर 2020 में एक अनजान नंबर से आए फोन कॉल से हुई थी, जिसके बाद दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई। शिकायतकर्ता बेंगलुरु में आरोपी से मिली और दिल्ली लौटने के बाद भी संपर्क में रही।
शिकार महिला के अनुसार, 24 दिसंबर 2020 को आरोपी ने उसे द्वारका के एक होटल में बुलाया और ठंडी ड्रिंक में कुछ मिलाकर दिया, जिससे वह बेहोश हो गई। होश आने पर उसने खुद को बिना कपड़ों के पाया और आरोपी ने एक वीडियो दिखाकर ब्लैकमेल किया। महिला का आरोप है कि उससे जबरन शारीरिक संबंध बनाए गए और Google Pay के जरिए करीब 1.5 लाख रुपये ट्रांसफर करवाए गए। घटना के चार महीने बाद 8 मई 2021 को द्वारका साउथ पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई थी।
बचाव पक्ष के वकील रवि ड्राल ने दलील दी कि FIR दर्ज कराने में काफी देरी हुई और इसका कोई संतोषजनक कारण नहीं दिया गया। होटल रिकॉर्ड से पता चला कि दोनों ने 24 से 26 दिसंबर 2020 तक जन्नत रेजिडेंसी और 26 से 27 दिसंबर तक इम्पीरियल होटल में साथ समय बिताया था। अदालत ने नोट किया कि महिला ने होटल में अपनी पहचान के दस्तावेज दिए थे और इस दौरान होटल स्टाफ या पुलिस से कोई शिकायत नहीं की।
अदालत ने यह भी गौर किया कि कथित घटना के बाद भी महिला आरोपी से मिलती रही और बातचीत करती रही। जांच के दौरान आरोपी के फोन से कोई भी आपत्तिजनक वीडियो बरामद नहीं हुआ और महिला ने अपना पुराना फोन टूटने का हवाला देकर पुलिस को नहीं सौंपा। अदालत ने कहा कि परिस्थितिजन्य साक्ष्यों, FIR में देरी और अन्य सबूतों के अभाव में आरोप साबित नहीं होते हैं।