दिल्ली: 2016 के ट्रिपल मर्डर केस में सबूतों की कमी, कोर्ट ने जावेद को किया बरी

राजधानी दिल्ली की एक अदालत ने साल 2016 के एक दिल दहला देने वाले ट्रिपल मर्डर केस में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सबूतों के अभाव में इस मामले में आरोपी जावेद को बरी कर दिया है। यह मामला दो महिलाओं और एक मासूम बच्ची की बेरहमी से हत्या से जुड़ा था, जिनके गले रेतकर उन्हें मौत के घाट उतार दिया गया था।
अडिशनल सेशन जज बलविंदर सिंह ने 30 सितंबर को अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष (Prosecution) आरोपी के खिलाफ पर्याप्त सबूत पेश करने में नाकाम रहा है। कोर्ट ने पाया कि जावेद को इस जघन्य अपराध से जोड़ने के लिए कोई सीधा, परिस्थितिजन्य या वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला, जिसके चलते उसे संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।
पैसे के विवाद में हुई थी हत्या, मुख्य आरोपी अब भी फरार
पुलिस की थ्योरी के मुताबिक, यह पूरी वारदात पैसों के लेन-देन के विवाद के कारण हुई थी। आरोप था कि रहीसुद्दीन उर्फ हैदर ने मेहरून निशा और उसकी मां सायरा से लिए गए 1 लाख रुपये वापस नहीं किए थे, जिसके बाद यह खूनी खेल खेला गया। इस मामले में जावेद पर आपराधिक साजिश (120B), हत्या (302) और सबूत मिटाने (201) की धाराओं के तहत मामला दर्ज था।
अदालत ने विशेष रूप से इस बात पर गौर किया कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर पाया कि जावेद ने सबूत मिटाने के लिए कोई मोबाइल फोन नष्ट किया था। इस पूरी कानूनी प्रक्रिया के दौरान वकील राज कमल आर्य ने एमिकस क्यूरी के रूप में कोर्ट की मदद की।
हालांकि, इस मामले में इंसाफ की तलाश अब भी जारी है क्योंकि इस वारदात का मुख्य संदिग्ध रहीसुद्दीन उर्फ हैदर साल 2022 से ही फरार चल रहा है। गौरतलब है कि इस मामले की एफआईआर उस्मानपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई थी।