दिल्ली उपभोक्ता अदालत का फैसला: कार चोरी का क्लेम खारिज करने वाली कंपनी को 8 लाख देने का आदेश

दिल्ली की एक उपभोक्ता अदालत ने बीमा कंपनी की मनमानी के खिलाफ बड़ा फैसला सुनाया है। उत्तर दिल्ली के जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग-I ने यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी प्राइवेट लिमिटेड को आदेश दिया है कि वह एक कार मालिक को उनकी चोरी हुई गाड़ी का मुआवजा दे। अदालत ने बीमा कंपनी द्वारा क्लेम खारिज करने के फैसले को पूरी तरह आधारहीन और मनमाना करार दिया है।
मामला नसीम अली नाम के व्यक्ति का है, जिनकी कार फरवरी 2020 में चोरी हो गई थी। नसीम ने तुरंत एफआईआर दर्ज कराई थी और अगस्त 2020 तक पुलिस ने गाड़ी को 'अनट्रेस' (न मिल पाने वाली) घोषित कर दिया था। कार की बीमा घोषित वैल्यू (IDV) 7,74,005 रुपये थी, लेकिन बीमा कंपनी ने क्लेम देने से साफ इनकार कर दिया।
बीमा कंपनी के बहानों को कोर्ट ने किया खारिज
बीमा कंपनी ने क्लेम रोकने के लिए कई तर्क दिए थे। कंपनी का दावा था कि गाड़ी का इस्तेमाल कमर्शियल (व्यावसायिक) उद्देश्यों के लिए किया जा रहा था, क्योंकि दो महीनों में गाड़ी 6,500 किलोमीटर चली थी और टोल रिकॉर्ड के अनुसार वह हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तराखंड जैसे राज्यों में घूमी थी। इसके अलावा, कंपनी ने यह भी आरोप लगाया कि मालिक ने गाड़ी को घर से 500 मीटर दूर पार्क करके लापरवाही बरती।
हालांकि, आयोग की अध्यक्ष दिव्या ज्योति जयपुरिया, सदस्य हरप्रीत कौर चर्या और अश्वनी कुमार मेहता ने इन दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने पाया कि बीमा कंपनी व्यावसायिक उपयोग का कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सकी और न ही यह साबित कर पाई कि गाड़ी असुरक्षित तरीके से खड़ी की गई थी।
अदालत ने बीमा कंपनी को आदेश दिया है कि वह नसीम अली को 7,74,005 रुपये की IDV राशि का भुगतान करे। साथ ही, 13 अप्रैल 2022 (शिकायत दर्ज करने की तारीख) से इस राशि पर 7% वार्षिक ब्याज भी देना होगा। इसके अलावा, मानसिक पीड़ा और कानूनी खर्चों के लिए कंपनी को 30,000 रुपये अतिरिक्त देने होंगे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बीमा कंपनी का यह रवैया सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का उदाहरण है।