दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला: प्रदूषण रोकने के लिए 10 दिसंबर से 20 जनवरी तक कंस्ट्रक्शन पर पूरी तरह रोक

दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 को घोषणा की कि सरकार राजधानी में सभी निर्माण गतिविधियों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाएगी। यह रोक 10 दिसंबर 2026 से 20 जनवरी 2027 तक लागू रहेगी। यह 42 दिनों का सस्पेंशन प्रशासन के व्यापक 'विंटर पॉल्यूशन एक्शन प्लान' का मुख्य हिस्सा है, जो हर साल 1 नवंबर से 28 फरवरी तक प्रभावी रहता है। इस आदेश का उद्देश्य सर्दियों के मौसम में निर्माण और डिमोलिशन स्थलों से उड़ने वाली धूल को नियंत्रित करके गंभीर वायु प्रदूषण के स्तर को कम करना है।
कंस्ट्रक्शन सामग्री के परिवहन पर भी प्रतिबंध
यह प्रतिबंध निर्माण सामग्री के परिवहन पर भी लागू होगा। इसमें रेत, एग्रीगेट, पत्थर, ईंट, सीमेंट और मलबा ले जाना शामिल है। हालांकि, राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं, आवश्यक सार्वजनिक बुनियादी ढाचे और सत्यापित आपातकालीन स्थितियों के लिए अनुमति दी जाएगी। अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए, सभी निर्माण और डिमोलिशन प्रोजेक्ट्स को 1 नवंबर से 31 जनवरी तक धूल नियंत्रण प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करना होगा। बड़े पैमाने पर निर्माण स्थलों और ऊंची इमारतों के लिए एंटी-स्मोग गन और मिस्ट सप्रेशन तकनीक का उपयोग करना अनिवार्य किया गया है। लोक निर्माण विभाग (PWD) ने पहचाने गए प्रदूषण वाले स्थानों पर 150 स्मोग गन और पानी के छिड़काव यंत्र तैनात करने की योजना बनाई है।
AI-पॉवर्ड 'डस्ट पोर्टल 2.0' से होगी सख्त निगरानी
नियमों के पालन के लिए निगरानी को और मजबूत किया जाएगा। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) का AI-पॉवर्ड 'डस्ट पोर्टल 2.0' जुलाई 2026 में लॉन्च किया गया था, जो इसमें मदद करेगा। यह प्रणाली 500 वर्ग मीटर से बड़े निर्माण स्थलों पर अनुपालन की निगरानी के लिए GIS मैपिंग, लाइव 360-डिग्री PTZ कैमरों और PM10 व PM2.5 सेंसर का उपयोग करती है। यह पोर्टल कंट्रोल एंड कमांड सेंटर द्वारा पकड़े गए उल्लंघनों के लिए अलर्ट जारी करता है और डिजिटल नोटिस जारी करने में सहायता करता है। मुख्यमंत्री गुप्ता ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार पिछले वर्षों में देखी गई अवैध निर्माण गतिविधियों को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है। नागरिकों को प्रोत्साहित किया जाता है कि वे उल्लंघनों की सीधे नगर निगम (MCD), स्थानीय विधायकों या मुख्यमंत्री कार्यालय को रिपोर्ट करें।