विशेषज्ञों ने दिल्ली में कहा: भारत को स्वास्थ्य सेवाओं में डिमेंशिया की रोकथाम और देखभाल को प्राथमिकता देनी चाहिए

Kittu Kumari27 September 20262 min read2 viewsDelhi Local
विशेषज्ञों ने दिल्ली में कहा: भारत को स्वास्थ्य सेवाओं में डिमेंशिया की रोकथाम और देखभाल को प्राथमिकता देनी चाहिए

दिल्ली में आयोजित होप फॉर डिमेंशिया कॉन्क्लेव 2026 में नीति निर्माताओं, डॉक्टरों और नेताओं ने कहा कि भारत को अपनी बढ़ती उम्र की आबादी के स्वास्थ्य के लिए डिमेंशिया की रोकथाम, पहचान और देखभाल को बढ़ावा देना चाहिए। यह कार्यक्रम 'होप एक आशा' द्वारा आयोजित किया गया था, जो डिमेंशिया से पीड़ित लोगों के लिए 25 साल से काम कर रहा है।

डिमेंशिया पर सार्वजनिक स्वास्थ्य के रूप में विचार

मुख्य अतिथि डॉक्टर वीके पॉल ने कहा कि डिमेंशिया को सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसमें करुणा और गरिमा सबसे ऊपर होनी चाहिए।डॉक्टर पॉल ने बताया कि डिमेंशिया की रोकथाम और बचाव काफी हद तक संभव है तथा इसे समय रहते टाला जा सकता है। उन्होंने आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के नेटवर्क को डिमेंशिया जागरूकता और पहचान के लिए एक अच्छा मंच बताया।

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विशेषज्ञों की राय और आंकड़े

वर्ष 2023 के एक अध्ययन के अनुसार भारत में 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के 7.4 प्रतिशत लोग यानी लगभग 88 लाख लोग डिमेंशिया से पीड़ित थे। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह संख्या वर्ष 2036 तक बढ़कर 1.69 करोड़ हो जाएगी। 'होप एक आशा' की संस्थापक डॉक्टर सुषमा चावला ने कहा कि डिमेंशिया की देखभाल केवल एक परिवार या एक डॉक्टर की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसके लिए पूरे समाज को मिलकर काम करना होगा। डॉक्टर अतुल प्रसाद ने कहा कि हमें डिमेंशिया के इलाज से आगे बढ़कर मस्तिष्क स्वास्थ्य और देखभाल पर ध्यान देना चाहिए।

सम्मेलन के मुख्य बिंदु और पैनल चर्चा

पैनल चर्चा के दौरान वक्ताओं ने डिमेंशिया अनुसंधान में निवेश बढ़ाने, मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने, ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच बढ़ाने और परिवारों के लिए लगातार सहायता की मांग की। सभी वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि डिमेंशिया से पीड़ित व्यक्ति के साथ-साथ उनके देखभाल करने वालों यानी केयरगिवर्स को भी पूरा समर्थन मिलना चाहिए। सम्मेलन का मुख्य संदेश यह था कि भारत में डिमेंशिया से निपटने के लिए रोकथाम, जल्दी पहचान, कुशल देखभाल और परिवारों को सहायता एक साथ विकसित करनी होगी।

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