दिल्ली में कॉलेज की पढ़ाई हुई महंगी, ट्यूशन फीस के अलावा रहना और खाना भी बना पेरेंट्स के लिए बड़ा आर्थिक बोझ

दिल्ली एनसीआर में पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट्स और उनके माता-पिता के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है। राजधानी के कॉलेजों में एडमिशन का दौर जैसे-जैसे तेज हो रहा है, वैसे-वैसे पेरेंट्स की जेब पर भी भारी असर पड़ने लगा है। दिल्ली में हायर एजुकेशन की लागत अब केवल कॉलेज की ट्यूशन फीस तक ही सीमित नहीं है, बल्कि हॉस्टल, पीजी, रूम रेंट और रोजाना के खर्चे पेरेंट्स का बजट बिगाड़ रहे हैं।
छिपे हुए खर्च बढ़ा रहे हैं पेरेंट्स की टेंशन
अक्सर देखा गया है कि कॉलेज में एडमिशन लेते समय माता-पिता केवल ट्यूशन फीस का ही हिसाब लगाते हैं, लेकिन बाद में रहने और खाने-पीने के खर्चे उनकी प्लानिंग पर भारी पड़ जाते हैं। दिल्ली के कॉलेजों के आसपास के इलाकों में रूम रेंट, खाने का खर्च, लोकल ट्रांसपोर्ट, ग्रॉसरी और बिजली-पानी के बिल जैसे जरूरी खर्चे सालाना बजट को बहुत ज्यादा बढ़ा देते हैं। इन अनियोजित खर्चों के कारण पेरेंट्स को अचानक से आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ता है।
लोकेशन और लाइफस्टाइल के हिसाब से बदलते हैं खर्चे
ट्यूशन फीस की तरह रहना और खाना हर जगह एक जैसा नहीं होता। यह खर्चे पूरी तरह से उस इलाके (Locality), हाउसिंग टाइप और स्टूडेंट के पर्सनल लाइफस्टाइल पर निर्भर करते हैं, जिससे पहले से सही बजट बनाना काफी मुश्किल हो जाता है। दिल्ली के बाहर से आने वाले एक स्टूडेंट के पिता नितिन गोयल ने इस बारे में अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि महीने के खर्चे उम्मीद से कहीं ज्यादा आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि सिर्फ कमरा का किराया ही सालाना बजट का बड़ा हिस्सा खा जाता है, और ऊपर से खाना-पीना व ट्रांसपोर्ट का खर्चा परिवार की शुरुआती उम्मीदों से बहुत ज्यादा निकल जाता है।
स्मार्ट फाइनेंसियल प्लानिंग है बेहद जरूरी
इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए, जो परिवार अपने बच्चों को घर से दूर दिल्ली में पढ़ा रहे हैं, उनके लिए यह बहुत जरूरी है कि वे हर महीने की फाइनेंशियल प्लानिंग (Financial Planning) बहुत ही सावधानी से करें। दिल्ली में पढ़ाई के दौरान आने वाले इन अनिश्चित और भारी खर्चों को आसानी से मैनेज करने के लिए पहले से ही पूरी तैयारी रखना ही एकमात्र समझदारी भरा कदम है।