दिल्ली में एंट्री बैन का डर: CNG किट लगवाने वालों की संख्या में 50% का उछाल
दिल्ली सरकार के सख्त उत्सर्जन नियमों के कारण NCR में CNG किट लगवाने वालों की संख्या 50% बढ़ी। जानें कौन सी गाड़ियां प्रतिबंधित हैं।

दिल्ली सरकार द्वारा वाहनों के प्रवेश के लिए लागू किए गए सख्त नियमों ने एनसीआर (NCR) के वाहन मालिकों की नींद उड़ा दी है। प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए इन कदमों के बाद अब लोग अपनी पेट्रोल और डीजल गाड़ियों को CNG में बदलवाने के लिए হুমियान की तरह वर्कशॉप्स पहुंच रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में प्रवेश प्रतिबंधों के डर से सीएनजी किट इंस्टॉलेशन में 50% की भारी बढ़ोतरी देखी गई है।
दरअसल, शहर के 'विंटर एक्शन प्लान' के तहत 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक बाहरी राज्यों में रजिस्टर्ड उन वाहनों के दिल्ली में प्रवेश पर रोक लगा दी गई है, जो BS-VI उत्सर्जन मानकों को पूरा नहीं करते। इसका सीधा असर नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद और फरीदाबाद से रोजाना दिल्ली आने वाले हजारों यात्रियों पर पड़ा है। BS-IV या उससे पुराने पेट्रोल और डीजल वाहनों पर यह पाबंदी लागू है, जिससे बचने के लिए लोग अब सीएनजी का रास्ता चुन रहे हैं।
प्रदूषण नियमों से बचने की जद्दोजहद
नियमों के मुताबिक, इलेक्ट्रिक वाहनों और आपातकालीन सेवाओं (जैसे एम्बुलेंस और फायर टेंडर) के साथ-साथ सीएनजी वाहनों को इस प्रतिबंध से छूट दी गई है। यही वजह है कि एनसीआर के कन्वर्जन सेंटर्स पर भारी भीड़ उमड़ रही है। बताया जा रहा है कि सीएनजी किट लगवाने का खर्च लगभग 35,000 रुपये से शुरू हो रहा है।
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) द्वारा इन नियमों को सख्ती से लागू किया जा रहा है। इसके साथ ही सरकार ने पेट्रोल पंपों पर 'नो PUCC, नो फ्यूल' की नीति लागू की है, जिसका मतलब है कि बिना वैध प्रदूषण प्रमाण पत्र के वाहन में ईंधन नहीं भरा जा सकेगा।
प्रदूषण कम करने के लिए उठाए गए इन कदमों के तहत 'ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान' (GRAP) के हिस्से के रूप में पार्किंग शुल्क में भी बदलाव किया गया है। दिल्ली मेट्रो लोकेशन को छोड़कर अन्य अधिकृत पार्किंग स्थलों पर फीस दोगुनी कर दी गई है, जो 28 फरवरी 2027 तक प्रभावी रहेगी।