महिलाओं को न्याय के लिए दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें: सीएम रेखा गुप्ता

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने महिलाओं की सुरक्षा और उन्हें मिलने वाले न्याय की प्रक्रिया को सरल बनाने की पुरजोर वकालत की है। उन्होंने कहा कि जब कोई महिला उत्पीड़न या हिंसा का शिकार होती है, तो उसे मदद के लिए एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर भागने के बजाय एक ही जगह पर त्वरित सहायता मिलनी चाहिए। शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में आयोजित 'महिला एवं बाल विकास' पर दो दिवसीय राष्ट्रीय विभागीय शिखर सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने अपनी बात रखी।
सीएम गुप्ता ने इस बात पर जोर दिया कि पुलिस, अस्पतालों, कानूनी सहायता सेवाओं और शेल्टर होम के बीच बेहतर तालमेल होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि ये सभी संस्थान मिलकर काम करेंगे, तभी पीड़ितों को सही समय पर जरूरी मदद मिल पाएगी। मुख्यमंत्री ने महिलाओं और बच्चों के लिए सहायता प्रणालियों को मजबूत करने के लिए पांच मुख्य प्राथमिकताएं तय की हैं, जिनमें पीड़ितों के लिए व्यक्तिगत केयर प्लान, हेल्पलाइन और वन स्टॉप सेंटर्स के बीच बेहतर समन्वय, कानूनी सहायता तक आसान पहुंच, बाल विवाह रोकना और कार्यस्थलों पर यौन उत्पीड़न के खिलाफ कानूनों का प्रभावी कार्यान्वयन शामिल है।
सुरक्षा के लिए दिल्ली सरकार के कदम और डिजिटल पहल
दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री ने कई महत्वपूर्ण उपायों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि सार्वजनिक स्थानों और ट्रांसपोर्ट में सुरक्षा बढ़ाने के लिए डीटीसी बसों में बस मार्शल की तैनाती और पैनिक बटन लगाए गए हैं। साथ ही, अंधेरे स्थानों (dark spots) पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और शाम की शिफ्ट में विशेष बसों में महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। स्कूलों में छात्राओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
कार्यस्थल पर होने वाले उत्पीड़न के खिलाफ उन्होंने 'SHe-Box' पोर्टल के उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही। सीएम ने कहा कि इस पोर्टल के जरिए महिलाएं ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकती हैं और उसे ट्रैक कर सकती हैं। उन्होंने विशेष रूप से निजी क्षेत्र में इस पोर्टल के प्रति जागरूकता बढ़ाने की जरूरत बताई।
बाल विवाह के मुद्दे पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने 'बाल विवाह मुक्त भारत' अभियान को मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि दिल्ली में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता बाल विवाह के मामलों की पहचान करने और परिवारों की काउंसलिंग करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। अंत में उन्होंने कहा कि महिलाओं की गरिमा की रक्षा और उन्हें समान अवसर देना ही विकसित भारत के सपने को साकार करेगा।
मुख्यमंत्री ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि देशभर में 998 वन स्टॉप सेंटर्स ने करीब 15.95 लाख महिलाओं की मदद की है, जबकि 431 शक्ति सदनों के जरिए 3.36 लाख महिलाओं को सहारा मिला है। उन्होंने हेल्पलाइन नंबर 181, इमरजेंसी नंबर 112 और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 की उपयोगिता पर भी प्रकाश डाला।