गोयला डेयरी में 16 करोड़ का बायोगैस प्लांट शुरू, यमुना को प्रदूषण से बचाने की बड़ी मुहिम

Kittu Kumari19 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
गोयला डेयरी में 16 करोड़ का बायोगैस प्लांट शुरू, यमुना को प्रदूषण से बचाने की बड़ी मुहिम

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को नजफगढ़ इलाके की गोयला डेयरी में एक अत्याधुनिक बायोगैस प्लांट का उद्घाटन किया। 16 करोड़ रुपये की लागत से दिल्ली नगर निगम द्वारा तैयार किए गए इस प्लांट की क्षमता 200 मीट्रिक टन प्रति दिन है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य पशुओं के कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान करना है, ताकि गोबर नालों के जरिए यमुना नदी में न जाकर उसे प्रदूषित करे और बदले में स्वच्छ ईंधन का उत्पादन हो सके।

उद्घाटन समारोह के दौरान ऊर्जा मंत्री आशीष सूद, मेयर प्रवेश वाही, डिप्टी मेयर डॉ. मोनिका पंत और विधायक संदीप सहरावत सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस मौके पर पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि डेयरी कॉलोनियों में ड्रेनेज और वेस्ट मैनेजमेंट जैसे बुनियादी ढांचे की हमेशा अनदेखी की गई। उन्होंने बताया कि पिछले 18 महीनों में सरकार ने तीन बायोगैस प्लांट शुरू किए हैं और छह अन्य पर काम चल रहा है। उन्होंने नंगली सकरावती प्लांट का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां एक साल में 55,000 टन गोबर प्रोसेस किया गया, जिससे किसानों को 3.5 करोड़ रुपये मिले।

'वेस्ट टू वेल्थ' विजन और बुनियादी ढांचे पर जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'वेस्ट टू वेल्थ' विजन को आगे बढ़ाते हुए, गोयला डेयरी का यह प्लांट रोजाना लगभग 14,000 क्यूबिक मीटर कच्चा बायोगैस और 5.6 टन कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) तैयार करेगा। इस गैस को पाइपलाइन के जरिए इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड को सप्लाई किया जाएगा, जबकि बची हुई स्लरी का इस्तेमाल जैविक खाद के रूप में होगा। इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने दिल्ली की डेयरी कॉलोनियों में ड्रेनेज और इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारने के लिए 50 करोड़ रुपये के फंड की घोषणा भी की।

इस योजना के तहत एजेंसी डेयरी संचालकों से 67 पैसे प्रति किलोग्राम की दर से गोबर इकट्ठा करेगी, जिससे पशुपालकों की कमाई का एक नया जरिया बनेगा। ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि पहले की सरकारें केवल डेरियों को शिफ्ट करने में यकीन रखती थीं, लेकिन वैज्ञानिक कचरा निपटान पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। वहीं, मेयर प्रवेश वाही ने इस प्लांट को यमुना में प्रदूषण कम करने और वेस्ट मैनेजमेंट की दिशा में एक मील का पत्थर बताया।

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