प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली सरकार का दांव, आर्टिफिशियल रेन के लिए किए क्लाउड सीडिंग ट्रायल
दिल्ली सरकार ने प्रदूषण से निपटने के लिए क्लाउड सीडिंग के जरिए आर्टिफिशियल रेन का ट्रायल किया है। जानें क्या है पूरी योजना।

दिवाली और छठ पूजा के बाद दिल्ली में बढ़ते भीषण प्रदूषण को कम करने के लिए सरकार अब 'आर्टिफिशियल रेन' यानी कृत्रिम बारिश का सहारा लेने पर विचार कर रही है। दिल्ली सरकार ने हवा में घुले जहरीले कणों को नीचे बैठाने के लिए क्लाउड सीडिंग तकनीक का विकल्प तलाशा है, ताकि शहर को इस दमघोंटू हवा से राहत मिल सके।
जानकारी के मुताबिक, दिल्ली सरकार ने आईआईटी कानपुर के साथ एक समझौता (MoU) किया है, जिसके तहत पिछले 15 दिनों में इंदिरा गांधी इंटरनेशनल (IGI) एयरपोर्ट के पास दो बार क्लाउड सीडिंग के ट्रायल किए गए हैं। इन ट्रायल्स में सिल्वर आयोडाइड और सोडियम क्लोराइड जैसे रसायनों का इस्तेमाल किया गया। खास बात यह है कि इस बार ये प्रयोग करीब 30,000 मीटर की ऊंचाई पर किए गए, जबकि पिछले साल यह ऊंचाई केवल 10,000 मीटर थी। हर बार इन ट्रायल्स के दौरान आठ केमिकल फ्लेयर्स का इस्तेमाल किया गया।
मौसम और चुनौतियों का असर
हालांकि, क्लाउड सीडिंग की यह प्रक्रिया जितनी सुनने में आसान लगती है, उतनी ही जटिल है। विशेषज्ञों का कहना है कि कृत्रिम बारिश के लिए आसमान में नमी वाले बादलों का होना बेहद जरूरी है, जो अक्सर सर्दियों के दौरान दिल्ली में नहीं होते। अक्टूबर 2025 में किए गए पिछले प्रयास भी बारिश कराने में नाकाम रहे थे। इसके अलावा, इस तकनीक के पर्यावरणीय प्रभाव और इसकी लंबी अवधि की प्रभावशीलता को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
फिलहाल दिल्ली पर्यावरण विभाग ने भविष्य की योजनाओं पर कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है, लेकिन उम्मीद है कि मौसम अनुकूल होने पर दिवाली के बाद इस संबंध में आधिकारिक घोषणा की जाएगी। दूसरी ओर, हवा की गुणवत्ता 'बेहद खराब' श्रेणी में पहुंचने के बाद कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के तीसरे चरण (Stage III) को लागू कर दिया है।