प्रदूषण से जंग: दिल्ली में क्लाउड सीडिंग के दो ट्रायल सफल, अब बारिश की तैयारी
दिल्ली सरकार ने वायु प्रदूषण से निपटने के लिए दो क्लाउड सीडिंग टेस्ट किए हैं। जानें कैसे काम करेगी यह तकनीक और क्या है अगला प्लान।

राजधानी में जहरीली हवा और 'वेरी पुअर' श्रेणी में पहुंच चुके वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। पिछले 15 दिनों के भीतर शहर में दिल्ली क्लाउड सीडिंग टेस्ट के दो सफल परीक्षण किए गए हैं। यह पूरी कवायद इंदिरा गांधी इंटरनेशनल (IGI) एयरपोर्ट के पास की गई, जहां करीब 30,000 मीटर की ऊंचाई पर ये प्रयोग किए गए। गौरतलब है कि 2025 के प्रयोगों में यह ऊंचाई केवल 10,000 मीटर थी, जिसे इस बार काफी बढ़ाया गया है।
दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति काफी गंभीर बनी हुई है। 5 नवंबर 2026 को शहर का औसत AQI 367 दर्ज किया गया, जबकि जहांगीरपुरी, आईआईटी दिल्ली और पंजाबी बाग जैसे इलाकों में तो हालात और भी खराब यानी 'गंभीर' स्तर पर पहुंच गए। ऐसे में सरकार आर्टिफिशियल रेन यानी कृत्रिम बारिश के जरिए हवा को साफ करने की कोशिश कर रही है। इस तकनीक में सिल्वर आयोडाइड और सोडियम क्लोराइड जैसे रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है, जिन्हें नमी वाले बादलों में छिड़का जाता है ताकि बारिश हो सके।
दिवाली और छठ पूजा के बाद फिर होगा प्रयास
पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि जब भी बादलों में पर्याप्त नमी होगी, इन ट्रायल्स को दोबारा दोहराया जाएगा। हालांकि, प्रशासन ने अभी दिवाली और छठ पूजा के त्योहारों के चलते कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन योजना है कि इन त्योहारों के बाद फिर से टेस्टिंग की जाए।
यह पहली बार नहीं है जब दिल्ली में ऐसा प्रयास किया गया हो। अक्टूबर 2025 में आईआईटी कानपुर के सहयोग से भी ऐसे प्रयोग हुए थे। हालांकि तब बारिश नहीं हुई थी, लेकिन सरकार का दावा था कि लक्षित क्षेत्रों में पार्टिकुलेट मैटर (PM) के स्तर में कमी आई थी। वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि कृत्रिम बारिश प्रदूषण की समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं है, लेकिन सर्दियों के पीक समय में यह एक आपातकालीन उपाय के तौर पर काम आ सकता है।