दिल्ली में पिछले 45 दिनों के दौरान बारिश के पानी से भरे गड्ढों और खुले नालों में डूबने से छह बच्चों की मौत हो गई है। इस घटना के बाद स्थानीय एजेंसियों की लापरवाही को लेकर लोगों में भारी गुस्सा है और जवाबदेही की मांग तेज हो गई है। इन एजेंसियों में नगर निगम, दिल्ली विकास प्राधिकरण और दिल्ली जल बोर्ड शामिल हैं। 25 अगस्त 2026 को जसोला में एक खुले नाले से 15 साल के मिथुन का शव मिला, जो चार दिन पहले उसमें गिर गया था। इस मामले में कार्रवाई करते हुए नगर निगम ने दक्षिण-पूर्वी जोन के कनिष्ठ अभियंता अनुज कुमार को निलंबित कर दिया है।
13 अगस्त को बवाना में डीडीए फ्लैट्स के पास पानी से भरे गड्ढे में डूबने से दो बच्चों की मौत हो गई, जिनकी उम्र करीब 10 साल थी। स्थानीय लोगों ने डीडीए पर सुरक्षा के इंतजाम न करने का आरोप लगाया है। इसके अलावा, 12 जुलाई को अलीपुर के हिरन की इलाके में पानी से भरे गड्ढे में आठ साल के आयुष और नौ से दस साल के नीतीश की मौत हो गई। इसी अवधि में अलीपुर क्षेत्र में यमुना नदी में नहाते समय चार नाबालिग बह गए थे, जिनमें से दो के शव बरामद कर लिए गए। 10 जुलाई को समयपुर बादली इलाके में पानी से भरे खाली प्लॉट में डूबने से सात साल के रेहान की मौत हो गई।
31 जुलाई 2026 को दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा कि खुले सीवर गड्ढे में 10 साल के बच्चे की मौत सरकारी लापरवाही है। अदालत ने दिल्ली सरकार और दिल्ली जल बोर्ड को ब्याज सहित 16.92 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक निर्माण स्थलों पर सुरक्षा सुनिश्चित करना संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी है। दिल्ली पुलिस ने माता-पिता से अपील की है कि वे मानसून के मौसम में विशेष सावधानी बरतें। दमकल विभाग और एनडीआरएफ ने चेतावनी दी है कि भारी बारिश के कारण पानी से भरे खतरों की गहराई का पता नहीं चलता है, जो बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं। 26 अगस्त 2026 तक उत्तम नगर जैसे इलाकों में जलभराव और जर्जर बुनियादी ढांचा लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा बने हुए हैं।