दिल्ली में बेटियों को गोद लेने का बढ़ा रुझान, 11 साल में 1000 से ज्यादा लड़कियों को मिला परिवार

राजधानी दिल्ली में बच्चों को गोद लेने के पैटर्न में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है। दिल्ली सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 11 वर्षों के दौरान लड़कों की तुलना में लड़कियों को गोद लेने की दर काफी अधिक रही है। साल 2015-16 से 2025-26 के बीच दिल्ली में 1,000 से ज्यादा लड़कियों और लगभग 760 लड़कों को नए परिवारों ने अपनाया है, जो समाज की बदलती सोच को दर्शाता है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो इस 11 साल की अवधि में सबसे अधिक गोद लेने के मामले साल 2015-16 में सामने आए थे, जब कुल 178 बच्चों को नए घरों में भेजा गया। इसके बाद इस संख्या में उतार-चढ़ाव देखा गया और साल 2021-22 में यह आंकड़ा गिरकर अपने न्यूनतम स्तर 87 पर पहुंच गया था। हालांकि, उसके बाद इसमें फिर से सुधार हुआ और 2022-23 में 94, 2023-24 में 97 और 2024-25 में 110 बच्चों को गोद लिया गया। वित्त वर्ष 2025-26 में यह संख्या 109 रही, जबकि साल 2026 के जनवरी से सितंबर के बीच अब तक 71 बच्चे गोद लिए जा चुके हैं।
विशेष जरूरतों वाले बच्चों और कानूनी प्रक्रिया पर जोर
विभाग ने उन बच्चों को भी परिवार दिलाने की कोशिशें तेज की हैं जिन्हें विशेष देखभाल की जरूरत है। साल 2025-26 में ऐसे छह बच्चों को गोद लिया गया, जिनमें से दो को देश के भीतर और चार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परिवार मिले।
बच्चों को गोद लेने की यह पूरी प्रक्रिया 'जुवेनाइल जस्टिस (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम' और 'अडॉप्शन रूल्स 2022' के तहत संचालित होती है। हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट ने भी इन नियमों के सख्ती से पालन करने पर जोर दिया है। कोर्ट के निर्देश के बाद सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी (CARA) को गोद लेने की प्रक्रिया में सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने को कहा गया है।
इसी कड़ी में, 11 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में एक जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। 'लीगल एडॉप्शन. सेफ चाइल्डहुड. सेफ फ्यूचर. से नो टू इल्लीगल एडॉप्शन' शीर्षक वाली इस वर्कशॉप में CARA, महिला एवं बाल विकास विभाग और दिल्ली राज्य दत्तक ग्रहण संसाधन एजेंसी (SARA) ने हिस्सा लिया। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को अवैध रूप से बच्चे गोद लेने के खतरों से आगाह करना और आधिकारिक कानूनी प्रक्रिया अपनाने के लिए प्रेरित करना था ताकि बच्चों के अधिकारों की रक्षा की जा सके।