दिल्ली के छवला में हादसा: सेप्टिक टैंक की जहरीली गैस ने ली जान, 3 मजदूर घायल
दिल्ली के छवला इलाके में सेप्टिक टैंक के अंदर जहरीली गैस inhaling से एक व्यक्ति की मौत हो गई और तीन अन्य घायल हो गए।

राजधानी दिल्ली के छवला इलाके से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जहां एक निर्माणाधीन सेप्टिक टैंक के अंदर काम कर रहे मजदूरों के लिए जहरीली गैस काल बन गई। इस हादसे में 38 वर्षीय मदन पंडित की मौत हो गई, जबकि उनके तीन अन्य साथी जहरीली गैस की चपेट में आने के कारण गंभीर रूप से घायल हो गए।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह हादसा तब हुआ जब मजदूर सेप्टिक टैंक की शटरिंग हटाने का काम कर रहे थे। टैंक के भीतर जमा जहरीली गैस के कारण मजदूर अचानक बेहोश होने लगे। मदन पंडित की जान नहीं बचाई जा सकी, जबकि अन्य तीन लोगों को तुरंत इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। यह घटना एक बार फिर इस बात को उजागर करती है कि बंद जगहों और सेप्टिक टैंकों में काम करना कितना खतरनाक हो सकता है, जहां बिना सुरक्षा इंतजामों के जहरीली गैसें जानलेवा साबित होती हैं।
सुरक्षा इंतजामों की अनदेखी और पुराने हादसे
दिल्ली में इस तरह के हादसे पहली बार नहीं हुए हैं। इससे पहले 26 जून को मुंडका इंडस्ट्रियल एरिया में भी एक फैक्ट्री के सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान तीन मजदूरों—अरुण, संदीप और चंद की मौत हो गई थी। उस मामले में परिजनों ने फैक्ट्री प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए थे कि उन्होंने मजदूरों को कोई सुरक्षा उपकरण (Protective Gear) मुहैया नहीं कराए थे। मुंडका हादसे में भी यही पैटर्न देखा गया था कि एक मजदूर गैस की वजह से गिरा और उसे बचाने के चक्कर में बाकी साथी भी अपनी जान गंवा बैठे।
इन घटनाओं के बीच दिल्ली हाई कोर्ट ने भी इस गंभीर मुद्दे पर संज्ञान लिया है। कोर्ट ने एक जनहित याचिका (PIL) पर दिल्ली सरकार और दिल्ली जल बोर्ड (DJB) से जवाब मांगा है। यह याचिका दलित आदिवासी शक्ति अधिकार मंच द्वारा दायर की गई है, जिसमें सीवर और सेप्टिक टैंक में काम करने वाले ठेका मजदूरों के नियमितीकरण और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई है। कोर्ट ने दिल्ली जल बोर्ड को निर्देश दिया है कि वह सीवर कार्यों में लगे सभी ठेकेदारों और मजदूरों का पूरा विवरण पेश करे।