दिल्ली-चेन्नई एक्सप्रेसवे: 7 राज्यों को जोड़ेगा 2,200 किमी लंबा कॉरिडोर, सफर होगा बेहद आसान

देश की कनेक्टिविटी को एक नई ऊंचाई देने के लिए सरकार एक मेगा प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। दिल्ली चेन्नई एक्सप्रेसवे के जरिए उत्तर और दक्षिण भारत के बीच की दूरी को कम करने की तैयारी है। करीब 2,200 किलोमीटर लंबा यह हाई-स्पीड कॉरिडोर न केवल यात्रा के समय को घटाएगा, बल्कि माल ढुलाई की लागत (लॉजिस्टिक्स कॉस्ट) में भी बड़ी कमी लाएगा। यह एक्सप्रेसवे दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु समेत सात राज्यों से होकर गुजरेगा।
फिलहाल दिल्ली से चेन्नई जाने के लिए यात्रियों को यमुना एक्सप्रेसवे, ग्वालियर, नागपुर और हैदराबाद जैसे पुराने रास्तों का सहारा लेना पड़ता है, या फिर दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का रास्ता चुनना होता है। लेकिन ये रास्ते तय करने में करीब 250 किलोमीटर ज्यादा चलना पड़ता है, जिससे ईंधन की खपत बढ़ती है और समय भी ज्यादा लगता है। इसी समस्या को दूर करने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) अब नए ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट्स को इस ग्रिड में जोड़ रहा है।
सफर में 320 किमी की होगी कमी, 2027 तक पूरा होगा काम
इस पूरे प्रोजेक्ट का सबसे अहम हिस्सा 'सूरत-कुर्नूल ग्रीन एक्सप्रेस हाईवे' है। उम्मीद है कि इसके बनने से दिल्ली और चेन्नई के बीच की कुल दूरी में लगभग 320 किलोमीटर की कमी आएगी। यह रूट सूरत, नासिक, अहमदनगर, सोलापुर और कुर्नूल जैसे प्रमुख शहरों को आपस में जोड़ेगा।
प्रोजेक्ट की रफ्तार को देखते हुए कई हिस्सों पर काम तेजी से चल रहा है। इनमें बेंगलुरु-चेन्नई एक्सप्रेसवे और 1,271 किलोमीटर लंबा नासिक-चेन्नई एक्सप्रेसवे शामिल हैं, जिनका निर्माण कार्य जारी है। हालांकि कुछ हिस्सों में लॉजिस्टिक बदलाव किए जा रहे हैं, लेकिन लक्ष्य यह है कि 2027 तक पूरा दिल्ली-चेन्नई ग्रिड तैयार हो जाए। इस बीच, कई महत्वपूर्ण सेक्शन साल 2025 और 2026 तक चालू होने की उम्मीद है।