दिल्ली में जातिगत आरक्षण के विरोध में जोरदार प्रदर्शन, भारी सुरक्षा बल तैनात

21 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में जातिगत आरक्षण के खिलाफ एक बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ। इस आंदोलन में शामिल होने के लिए कोटा से 20 युवाओं का एक समूह विशेष रूप से दिल्ली आया था। यह प्रदर्शन इंस्टाग्राम पर बने 'Reservation Hatao Andolan' पेज के माध्यम से प्रचारित किया गया था, जिसके बाद प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर इकट्ठा हुए। दिल्ली पुलिस ने पहले इस सभा की अनुमति देने से इनकार कर दिया था और सोशल मीडिया पर चल रहे ऐसे आह्वान को फर्जी और भ्रामक बताया था।
नई दिल्ली जिले में सुरक्षा व्यवस्था बहुत कड़ी थी क्योंकि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू थी, जिसके तहत पांच या अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर प्रतिबंध था। हालांकि पुलिस ने जंतर-मंतर से प्रदर्शनकारियों को हटा दिया, लेकिन बाद में उन्होंने रामलीला मैदान में शाम 4 बजे तक अधिकतम 500 लोगों के इकट्ठा होने के लिए 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (NOC) जारी कर दिया। आरक्षण नीतियों में सुधार की वकालत करने वाली संस्था समता आंदोलन समिति ने भी इस आंदोलन का समर्थन किया।
इसी दौरान राजधानी का राजनीतिक माहौल भी काफी गर्म रहा। 21 अगस्त को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने संसद स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पर एक धरना दिया, जिसमें उन्होंने 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए एक अन्य प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन की चोट लगने वाले एक छात्र के लिए जवाबदेही की मांग की। यह तनाव सुप्रीम कोर्ट के 20 अगस्त 2026 के उस फैसले के बाद से जारी है जिसमें 20 जुलाई की घटनाओं से जुड़ी पुलिस ज्यादती और हिंसा के आरोपों की जांच के लिए पूर्व जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन किया गया है।