दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला, जीटीबी अस्पताल में बनेगा 250 बेड का नया ट्रॉमा ब्लॉक

दिल्ली कैबिनेट ने पूर्वी दिल्ली के दिलशाद गार्डन स्थित गुरु तेग बहादुर यानी जीटीबी अस्पताल में सात मंजिला सुपर-स्पेशलिटी-सह-ट्रॉमा ब्लॉक के निर्माण को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को हुई कैबिनेट बैठक में इस परियोजना को हरी झंडी दिखाई गई। इस परियोजना को 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है और इसकी अनुमानित लागत लगभग 244.87 करोड़ रुपये है। यह पहल प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के चौथे चरण के अंतर्गत आती है। विकास के लिए फंडिंग केंद्र और दिल्ली सरकारों के बीच साझा की जाएगी, जिसमें निर्माण प्रगति की त्रैमासिक निगरानी के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की एक संयुक्त समिति बनाई गई है। केंद्रीय सरकारी एजेंसी हॉस्पिटल सर्विसेज कंसल्टेंसी कॉर्पोरेशन लिमिटेड को इस परियोजना को निष्पादित करने के लिए नामित किया गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस बात पर जोर दिया कि यह सुविधा पूर्वी दिल्ली के प्राथमिक सरकारी अस्पताल के भारी मरीज के भार को संबोधित करती है। उन्होंने कहा कि नए ब्लॉक का उद्देश्य आपातकालीन, डायग्नोस्टिक, सर्जिकल और गहन देखभाल सेवाओं को एकीकृत करना है। जीटीबी अस्पताल के अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रवीण कुमार ने बताया कि यह मल्टी-स्पेशलिटी सुविधा ट्रॉमा रिस्पॉन्स और आपातकालीन देखभाल को सुव्यवस्थित करेगी। यह 22,550 वर्ग मीटर की इमारत मौजूदा परिसर के भीतर बनाई जाएगी और इसमें बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर और छह ऊपरी मंजिलें होंगी। 250 बिस्तरों की क्षमता में 77 क्रिटिकल-केयर बेड शामिल होंगे, जिनमें 70 आईसीयू बेड और 5 बर्न आईसीयू बेड हैं। इसके अलावा 20 इमरजेंसी बेड, 4 आइसोलेशन बेड, 22 प्री- और पोस्ट-सर्जरी बेड, 102 जनरल वार्ड बेड और 25 प्राइवेट कमरे शामिल हैं। योजनाबद्ध सुविधाओं में ग्राउंड फ्लोर पर 24 घंटे आपातकालीन विभाग, नौ ऑपरेशन थिएटर और एक बेसमेंट ब्लड बैंक शामिल हैं। डायग्नोस्टिक क्षमताओं में सीटी स्कैन, एमआरआई, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड और प्रयोगशाला सेवाएं शामिल होंगी, जिन्हें 48 स्पेशलिस्ट ओपीडी कमरों का समर्थन मिलेगा। दूसरी मंजिल पर 72 बेड का आईसीयू होगा, जबकि छठी मंजिल प्रशिक्षण सुविधाओं के लिए आरक्षित है, जिसमें कार्यालय, कक्षाएं और एक प्रयोगशाला शामिल है। विशेषता सेवाओं में न्यूरोलॉजी, ऑर्थोपेडिक्स, डर्मेटोलॉजी और दंत चिकित्सा शामिल होंगी। इस परियोजना का उद्देश्य पूर्वी दिल्ली में ट्रॉमा बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देना और एम्स और सफदरजंग अस्पताल जैसे संस्थानों पर मरीजों के बोझ को कम करना है।