दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला: सर्दियों से पहले ईवी रोड स्वीपर और आईआईटी दिल्ली के साथ प्रदूषण ट्रैकिंग को मंजूरी

Kittu Kumari29 September 20262 min read2 viewsDelhi Local
दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला: सर्दियों से पहले ईवी रोड स्वीपर और आईआईटी दिल्ली के साथ प्रदूषण ट्रैकिंग को मंजूरी

नई दिल्ली में सर्दियों से पहले प्रदूषण नियंत्रण उपायों को मजबूत करने के लिए दिल्ली सरकार ने दो अहम फैसले लिए हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में छोटे सड़कों पर 30 इलेक्ट्रिक वाहन आधारित मैकेनिकल रोड-सफाई मशीनों और आईआईटी दिल्ली के सहयोग से एक रियल-टाइम पीएम2.5 और पीएम10 स्रोत निगरानी प्रणाली को मंजूरी दी गई है। इस संबंध में एक आधिकारिक विज्ञप्ति जारी की गई है। सड़क सफाई अभियान के तहत उन सड़कों पर मशीनीकृत सफाई का विस्तार किया जाएगा जहां यह सुविधा अभी उपलब्ध नहीं है। इसमें 10 मीटर से कम चौड़ाई वाले लगभग 609 किलोमीटर सड़क मार्ग शामिल हैं, जिसके लिए 250 वार्डों में 854 सड़कों की पहचान की गई है। इन मशीनों को दिल्ली सरकार के अनुदान से खरीदा जाएगा, जबकि एमसीडी इनका संचालन करेगी। इन 30 इलेक्ट्रिक सफाई मशीनों की लागत 10 वर्षों में लगभग 393.73 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग का उद्देश्य सड़क की धूल को कम करना और सफाई प्रक्रिया को पर्यावरण की दृष्टि से स्वच्छ रखना है। कैबिनेट ने पीएम2.5 और पीएम10 के स्रोतों को लगातार ट्रैक और विश्लेषण करने के लिए आईआईटी दिल्ली के साथ पांच साल के सहयोग को भी मंजूरी दे दी है। यह प्रणाली वाहनों से होने वाले उत्सर्जन, सड़क की धूल और बायोमास जलाने जैसे प्रमुख योगदानकर्ताओं की जांच करेगी और पूरे दिन उनके योगदान पर डेटा प्रदान करेगी। इस परियोजना के हिस्से के रूप में, राउज एवेन्यू में मौजूदा सुपर साइट और एक मोबाइल प्रयोगशाला को फिर से सक्रिय किया जाएगा। साथ ही एक रियल-टाइम डैशबोर्ड और विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग प्रणाली भी विकसित की जाएगी, और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के अधिकारियों की क्षमता को मजबूत किया जाएगा। इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 19.22 करोड़ रुपये है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सरकार के प्रदूषण नियंत्रण प्रयास सीमित सर्दियों के महीनों के बजाय पूरे वर्ष जारी रहेंगे। उन्होंने कहा कि विभाग, एमसीडी, डीपीसीसी और वैज्ञानिक संस्थान सड़क की धूल, वाहनों, निर्माण गतिविधियों, उद्योगों और कचरे या बायोमास जलाने से होने वाले प्रदूषण से निपटने के लिए मिलकर काम करेंगे। ये दोनों फैसले दिल्ली के विंटर एक्शन प्लान 2026-27 का हिस्सा हैं, जिसमें सरकार ने स्रोतों पर प्रदूषण से निपटने के लिए जमीनी स्तर की कार्रवाई, स्वच्छ तकनीक और वैज्ञानिक निगरानी को संयोजित करने का लक्ष्य रखा है।

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