दिल्ली के कारोबारी को मिला नया जीवन, 11 साल बाद हुआ सफल हार्ट ट्रांसप्लांट

दिल्ली के एक 47 वर्षीय कारोबारी के लिए जिंदगी की जंग आखिरकार जीत की खबर लेकर आई है। करीब 11 साल तक दिल की गंभीर बीमारी से जूझने के बाद, इस व्यक्ति का सफल हार्ट ट्रांसप्लांट किया गया है। यह मामला इसलिए खास है क्योंकि मरीज ने महज 37 साल की उम्र में एक गंभीर हार्ट अटैक का सामना किया था, जिसके बाद से उनकी सेहत लगातार गिरती जा रही थी।
पिछले महीने हुए इस जटिल ऑपरेशन में रोहतक के PGIMS अस्पताल से मिले एक डोनर अंग का इस्तेमाल किया गया। अंग को सुरक्षित और तेजी से दिल्ली तक पहुँचाने के लिए प्रशासन ने 'ग्रीन कॉरिडोर' बनाया, ताकि बिना किसी ट्रैफिक रुकावट के समय पर ट्रांसप्लांट किया जा सके। मेडिकल टीम की मेहनत और डोनर की दरियादिली ने इस कारोबारी को एक नई जिंदगी दे दी है।
भारत में अंगदान की गंभीर चुनौती
जहाँ एक तरफ यह मामला उम्मीद जगाता है, वहीं दूसरी ओर भारत में अंगों की भारी कमी की डरावनी तस्वीर भी सामने आती है। आंकड़ों के मुताबिक, 3 मार्च 2026 तक देश में ट्रांसप्लांट की प्रतीक्षा सूची में 89,839 मरीज थे, जिनमें से 1,650 लोगों को दिल के ट्रांसप्लांट की सख्त जरूरत थी।
सरकारी अनुमानों के अनुसार, देश में सालाना लगभग 50,000 हार्ट ट्रांसप्लांट की आवश्यकता होती है, लेकिन वास्तविक संख्या इसके मुकाबले बेहद कम है। 'द लैंसेट रीजनल हेल्थ-साउथईस्ट एशिया' की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2021 में कुल जरूरत का केवल 0.2% हिस्सा ही पूरा हो पाया था।
भारत में अंग प्रत्यारोपण की प्रक्रिया 'मानव अंग और ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम (THOTA), 1994' और 2014 के नियमों के तहत संचालित होती है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने 3 अगस्त 2026 को ब्रेन स्टेम डेथ सर्टिफिकेशन और स्वैप ट्रांसप्लांटेशन के लिए नए दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। हालांकि 'जुग जुग जियो अभियान' और अंगदान दिवस जैसे प्रयासों के बावजूद, भारत में अंगदान की दर अभी भी आबादी के 1% से कम है, जो इस केस में मिले डोनर के योगदान को और भी महत्वपूर्ण बना देता है।