दिल्ली बस सामूहिक बलात्कार मामला: आरोपियों के डीएनए सैंपल पीड़िता के कपड़ों से हुए मैच, चार्जशीट दाखिल

दिल्ली पुलिस ने ग्रेटर नोएडा से दिल्ली आ रही चलती स्लीपर बस में एक नाबालिग के साथ कथित सामूहिक बलात्कार के मामले में दो आरोपियों के खिलाफ तीस हजारी कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस मामले में गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपी बस के ड्राइवर और कंडक्टर हैं। पुलिस के अनुसार, फॉरेंसिक जांच में दोनों आरोपियों के डीएनए प्रोफाइल पीड़िता के कपड़ों और बस से बरामद जैविक नमूनों से मेल खा गए हैं। ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, 18 सितंबर को दायर की गई इस 398 पन्नों की चार्जशीट में 51 अभियोजन गवाहों के बयान शामिल हैं। अदालत ने 24 सितंबर को इस चार्जशीट पर संज्ञान लिया था और मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को तय की गई है।
घटना का विवरण और पुलिस जांच
पुलिस जांच के अनुसार, यह घटना 4 अगस्त की रात की है जब उत्तर प्रदेश के मैनपुरी से आई नाबालिग ग्रेटर नोएडा के परी चौक के पास एक स्लीपर बस में चढ़ी थी। वह नोएडा के सेक्टर 63 में अपने एक रिश्तेदार के घर जाने की कोशिश कर रही थी और उस इलाके से अनजान थी। पुलिस का आरोप है कि बस के अंदर नाबालिग के साथ यौन उत्पीड़न किया गया और चलती बस दिल्ली के कश्मीरी गेट इलाके तक पहुंची, जहां उसे छोड़ दिया गया था। इसके बाद पीड़िता ने पुलिस से संपर्क किया और कश्मीरी गेट पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कराया गया। पुलिस टीमों ने सीसीटीवी फुटेज की जांच करके बस को दिल्ली के तिमारपुर पार्किंग क्षेत्र से ट्रेस किया और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
फॉरेंसिक साक्ष्य और बस की कमियां
जांचकर्ताओं ने बस से बाल और वीर्य जैसे जैविक नमूने एकत्र किए थे जिन्हें फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) भेजा गया था। चार्जशीट में कहा गया है कि आरोपियों के डीएनए प्रोफाइल जांच के दौरान बरामद नमूनों से मेल खाते हैं। इसके अलावा, जांच में बस से जुड़े कई सुरक्षा और विनियामक मुद्दे भी सामने आए हैं, जिसमें बस का सीसीटीवी कैमरा काम न करना और परमिट व सुरक्षा आवश्यकताओं से जुड़े 11 पेंडिंग ट्रैफिक चालान शामिल हैं। पुलिस ने यह भी पाया कि ड्राइवर और कंडक्टर को बिना पुलिस वेरिफिकेशन के काम पर रखा गया था। सुप्रीम कोर्ट ने भी 28 सितंबर को दिल्ली-एनसीआर की ऐसी घटनाओं पर स्वतः संज्ञान लिया है।