दिल्ली में बिल्डिंग सेफ्टी ऑडिट: MCD ने गिनाईं मुश्किलें, बजट और स्टाफ की भारी कमी
दिल्ली की सभी इमारतों के सेफ्टी ऑडिट के लिए MCD ने चुनौतियों का ब्यौरा दिया है। मैनपावर और बजट की कमी से काम अटक सकता है।

राजधानी दिल्ली में इमारतों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने पूरे शहर में स्ट्रक्चरल और फायर सेफ्टी ऑडिट कराने का आदेश दिया है। हालांकि, इस बड़े अभियान को जमीन पर उतारने में दिल्ली नगर निगम (MCD) को भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। MCD ने अपने एक ड्राफ्ट रोडमैप में साफ किया है कि मैनपावर की कमी, विशेषज्ञों का अभाव और भारी वित्तीय बोझ इस प्रोजेक्ट की राह में सबसे बड़े रोड़े हैं।
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब सत्य निकेतन, पालम (जहां 9 लोगों की जान गई), सैदुलाजाब, सीमापुरी और हर्ष विहार जैसे इलाकों में इमारतों के गिरने और आग लगने की दर्दनाक घटनाएं हुईं। इसके बाद 17 अक्टूबर 2026 को गृह मंत्रालय ने निर्देश जारी किए कि दिल्ली की सभी इमारतों, जिनमें अनधिकृत कॉलोनियां भी शामिल हैं, का सेफ्टी ऑडिट किया जाए। इस रोडमैप को 31 अक्टूबर 2026 तक मंत्रालय को सौंपना है।
32 लाख से ज्यादा इमारतें और संसाधनों का अभाव
MCD अधिकारियों के मुताबिक, दिल्ली में इमारतों की संख्या इतनी ज्यादा है कि उनका ऑडिट करना एक हिमालयी चुनौती जैसा है। अनुमान है कि शहर में करीब 32.5 लाख इमारतें हैं (सेंसस 2027 के पहले चरण के अनुसार लगभग 76 लाख घर)। इतनी बड़ी संख्या में निरीक्षण के लिए MCD के पास कोई स्थायी स्ट्रक्चरल इंजीनियर यूनिट नहीं है। वर्तमान में निगम केवल 249 पैनलबद्ध थर्ड-पार्टी इंजीनियरों पर निर्भर है।
अगर इन सभी इमारतों का निरीक्षण करना पड़ा, तो गणित के हिसाब से एक इंजीनियर को 13,000 से ज्यादा प्रॉपर्टीज की जांच करनी होगी, जो व्यावहारिक रूप से नामुमकिन है। इसके अलावा, बजट की समस्या भी गंभीर है। एक सामान्य स्ट्रक्चरल असेसमेंट की लागत 15,000 से 50,000 रुपये के बीच होती है, जिसका मतलब है कि पूरे प्रोजेक्ट पर हजारों करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं।
चुनौतियां सिर्फ कागजों और पैसों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जमीनी स्तर पर भी हैं। ड्राफ्ट में जिक्र है कि कई निवासी अपनी प्रॉपर्टी के अंदर जांच टीम को आने देने में आनाकानी कर सकते हैं।
पुराने रिकॉर्ड्स भी बताते हैं कि दिल्ली में नियमों का पालन करवाना कितना मुश्किल है। जून 2020 के आंकड़ों के अनुसार, 4,762 हाई-रिस्क या पुरानी इमारतों में से केवल 1,155 की स्ट्रक्चरल रिपोर्ट ही जमा हो पाई थी। इसके अलावा, डीडीए ने भी सितंबर 2026 में 15 मीटर से ऊंची पुरानी इमारतों के लिए ऑडिट अनिवार्य किया था। अब इस नए व्यापक ऑडिट के लिए MCD को दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA), दिल्ली फायर सर्विस, NDMC और दिल्ली पुलिस के साथ तालमेल बिठाकर काम करना होगा।