दिल्ली में गिरती इमारतें: DDA के पूर्व अधिकारी ने बुनियादी ढांचागत सुधारों की मांग की
पुरानी दिल्ली में हादसा होने के बाद DDA के पूर्व कमिश्नर ने बुनियादी ढांचागत बदलावों की मांग की है। पढ़ें पूरी खबर।

पुरानी दिल्ली में एक निर्माणाधीन इमारत गिरने से हुए दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर राजधानी के बुनियादी ढांचे पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना के बाद दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के पूर्व प्लानिंग कमिश्नर अशोक कुमार जैन ने चेतावनी दी है कि दिल्ली के शहरी संकट को केवल कागजों पर कॉलोनियों के नियमितीकरण से हल नहीं किया जा सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि शहर के बुनियादी ढांचे में अब बुनियादी ढांचागत सुधारों (Structural Reforms) की सख्त जरूरत है, ताकि लाखों लोगों की जान बचाई जा सके जो अनियोजित क्षेत्रों में रह रहे हैं।
यह पूरा मामला 5 नवंबर 2026 का है, जब चावड़ी बाजार की गली शेहातरा में एक तीन मंजिला निर्माणाधीन इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई। इस हादसे में दो लोगों की जान चली गई और कई अन्य घायल हो गए। नगर निगम (MCD) की शुरुआती जांच में खुलासा हुआ कि यह इमारत पूरी तरह अनधिकृत थी। इसमें न तो कोई स्वीकृत बिल्डिंग प्लान था और न ही निर्माण में इंजीनियरिंग मानकों का पालन किया गया था। छत के स्लैब को भी बेहद गलत तरीके से बनाया गया था।
लापरवाही और प्रशासनिक विफलता
हैरानी की बात यह है कि प्रशासन को इस खतरे की भनक पहले ही लग चुकी थी। दिल्ली पुलिस ने 15 जून 2026 को ही MCD को इस अवैध निर्माण के बारे में सूचित कर दिया था। इसके अलावा, अप्रैल 2026 में MCD ने इमारत की जर्जर हालत को लेकर एक एडवाइजरी भी जारी की थी। इसके बावजूद, इमारत के मालिक समीउल्लाह ने मरम्मत के नाम पर अवैध निर्माण जारी रखा।
इस त्रासदी के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही, ठेकेदार और मालिक दोनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 के तहत FIR दर्ज करने का निर्देश दिया है। जवाबदेही तय करते हुए MCD ने लापरवाही बरतने वाले दो इंजीनियरों को निलंबित कर दिया है और आसपास की इमारतों के सुरक्षा सर्वे के आदेश दिए हैं। स्टैंडिंग कमेटी की चेयरपर्सन सत्य शर्मा ने कमिश्नर से तीन दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
गौरतलब है कि साल 2026 में दिल्ली ने कई ऐसे हादसे देखे हैं। हर्ष विहार, न्यू सीमापुरी, सत्य निकेतन, सैदुला-अजाइब और रोहिणी में भी इमारतें गिरीं। सितंबर में सत्य निकेतन हादसे के बाद सरकार ने स्कूलों, नर्सिंग होम और PG जैसे सार्वजनिक स्थानों के लिए अनिवार्य स्ट्रक्चरल ऑडिट और सुरक्षा प्रमाणपत्र की नई नीति लाने की घोषणा की थी।