दिल्ली में अवैध निर्माण का कहर: 6 महीने में ढहीं 321 इमारतें, कई की गई मौत
दिल्ली में अवैध निर्माण और लापरवाही के कारण 6 महीने में 321 घर ढहे। कई हादसे जानलेवा रहे, प्रशासन ने अब सख्त कार्रवाई शुरू की है।

देश की राजधानी दिल्ली में अवैध निर्माण और घटिया स्ट्रक्चरल प्लानिंग अब जानलेवा साबित हो रही है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से सितंबर के बीच दिल्ली में कुल 321 मकान और इमारतें जमींदोज हो गईं। इन हादसों ने शहर में बिल्डिंग बाय-लॉज की अनदेखी और नगर निगम की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे डराने वाली बात यह है कि इन ढहती इमारतों के मलबे ने कई परिवारों की खुशियां छीन ली हैं।
हालिया घटनाओं ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। 26 अक्टूबर को हर्ष विहार के मिलन गार्डन में एक निर्माणाधीन इमारत गिरने से दो मजदूरों, 60 वर्षीय चंद्रपाल और उनके 33 साल के बेटे विजय कुमार की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि एक पुराने रिहायशी ढांचे में अवैध रूप से विस्तार किया जा रहा था, जो हादसे का कारण बना। इससे पहले 6 सितंबर को सत्य निकेतन में एक पांच मंजिला पीजी बिल्डिंग गिरने से सात लोगों की जान चली गई थी। इसी तरह के बड़े हादसों में साकेत के सैदुलजाब (30 मई), रोहिणी सेक्टर-16 (8 जुलाई) और दिलशाद गार्डन (29 सितंबर) में भी कई मौतें दर्ज की गईं। अक्टूबर की शुरुआत में सीमपुरी में एक घर गिरने से पांच और लोगों की जान चली गई।
प्रशासन की कार्रवाई और राजनीतिक घमासान
इन त्रासदियों के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अवैध निर्माणों के खिलाफ एक बड़ा अभियान चलाने का निर्देश दिया है। इसके जवाब में दिल्ली नगर निगम (MCD) अब एक्शन मोड में है और शहर के सभी 12 जोन में अवैध संपत्तियों को सील करने और ढहाने का काम तेज कर दिया गया है। उदाहरण के तौर पर, 3 अक्टूबर को 16 और 21 सितंबर को 44 इमारतों को गिराया गया। सत्य निकेतन हादसे के बाद सरकार ने पीजी, स्कूलों और नर्सिंग होम के स्ट्रक्चरल ऑडिट के आदेश दिए हैं, साथ ही लापरवाही बरतने वाले दक्षिण जोन MCD के पांच वरिष्ठ अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है।
सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए 28 अगस्त को दिल्ली फायर सर्विस (संशोधन) नियम, 2026 के तहत नए अग्नि सुरक्षा मानक भी लागू किए गए हैं। हालांकि, इन सबके बीच राजनीति भी गरमा गई है। आम आदमी पार्टी के दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने सिस्टम में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकारी विभाग निरीक्षण के नाम पर रिश्वत वसूल रहे हैं, फिर भी इमारतों के गिरने का सिलसिला थम नहीं रहा है।