दिल्ली में BS-4 वाहनों पर प्रतिबंध की तैयारी, ट्रांसपोर्टरों ने खोला मोर्चा

दिल्ली सरकार 1 नवंबर से BS-4 डीजल और BS-3 पेट्रोल वाहनों पर प्रतिबंध लगा रही है, जिससे ट्रांसपोर्टरों में भारी गुस्सा है।

Kittu Kumari28 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
दिल्ली में BS-4 वाहनों पर प्रतिबंध की तैयारी, ट्रांसपोर्टरों ने खोला मोर्चा

राजधानी दिल्ली में प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है, लेकिन इस फैसले ने ट्रांसपोर्टरों की नींद उड़ा दी है। 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक दिल्ली में BS-4 डीजल और BS-3 पेट्रोल वाहनों के चलने पर पाबंदी लगाने की तैयारी है। यह कदम ग्रैडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के स्टेज-III के तहत उठाया जा रहा है, जिसका सीधा असर दिल्ली के बाहर से आने वाले उन कमर्शियल और प्राइवेट वाहनों पर पड़ेगा जो BS-6 उत्सर्जन मानकों को पूरा नहीं करते हैं।

इस फैसले के बाद ट्रांसपोर्ट जगत में भारी आक्रोश है। नेशनल ट्रक ऑपरेटर वेलफेयर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहन सिंह ने इसे एक 'ब्लैंकेट बैन' करार देते हुए कहा है कि इससे छोटे और मध्यम स्तर के ट्रांसपोर्टरों की रोजी-रोटी छिन जाएगी। उन्होंने सरकार से सवाल किया है कि ग्रीन टैक्स के रूप में वसूले गए 3,000 करोड़ रुपये का इस्तेमाल प्रदूषण कम करने के लिए क्यों नहीं किया गया? उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने इस फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया, तो बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे।

जुर्माना और अन्य सख्त पाबंदियां

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प्रशासन ने साफ कर दिया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों को 20,000 रुपये का भारी जुर्माना भरना होगा। इसके अलावा, जिन वाहनों के पास वैध PUC सर्टिफिकेट नहीं होगा, उन्हें पेट्रोल पंपों पर ईंधन देने से भी मना किया जा सकता है। मेरठ और बुलंदशहर जैसे एनसीआर इलाकों में परिवहन अधिकारियों ने ट्रांसपोर्टरों के साथ बैठकें शुरू कर दी हैं। मेरठ में ही करीब एक लाख वाहन इस प्रतिबंध की चपेट में आ सकते हैं।

टैक्सी और टूरिस्ट ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय सम्राट ने कहा कि पर्यटकों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करना एक बड़ी चुनौती होगी। वहीं, नोएडा और आसपास के इलाकों में इस पाबंदी की वजह से टैक्सी किराए और माल ढुलाई शुल्क में 20 से 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी होने की आशंका है।

हालांकि, इस प्रतिबंध से कुछ राहत भी दी गई है। CNG और इलेक्ट्रिक वाहन, इमरजेंसी सेवाएं, सरकारी ड्यूटी पर तैनात गाड़ियां और दिल्ली में रजिस्टर्ड बसें इस पाबंदी से मुक्त रहेंगी। इसके साथ ही, प्रदूषण कम करने की योजना के तहत 1 नवंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 के बीच निजी और सरकारी संस्थानों के कर्मचारियों को 'वर्क फ्रॉम होम' करने की सलाह भी दी जा सकती है।

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