दिल्ली में BS-VI नियमों की सख्ती, दूसरे दिन बॉर्डर पर कड़ा पहरा
दिल्ली में प्रदूषण रोकने के लिए BS-VI नियमों की सख्ती बढ़ी। पहले दिन 1500 से ज्यादा गाड़ियां वापस भेजी गईं और भारी जुर्माना लगा।

राजधानी दिल्ली में प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। शहर में BS-VI उत्सर्जन मानकों (emission standards) को लागू करने के दूसरे दिन अधिकारियों ने सख्ती और बढ़ा दी है। 2 नवंबर 2026 को दिल्ली के विभिन्न बॉर्डर पॉइंट्स पर वाहनों की गहन जांच की जा रही है, ताकि केवल निर्धारित मानकों वाली गाड़ियां ही शहर में प्रवेश कर सकें।
इस अभियान के पहले दिन यानी 1 नवंबर को ही प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया था। आंकड़ों के मुताबिक, पहले दिन करीब 15,000 वाहनों की जांच की गई, जिनमें से 1,539 गाड़ियां BS-VI मानकों पर खरी नहीं उतरीं और उन्हें वापस भेज दिया गया। इसके अलावा, प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUCC) न होने पर 566 चालान काटे गए। पहले दिन ही जुर्माने और पर्यावरणीय मुआवजे के रूप में कुल 68.4 लाख रुपये वसूले गए, जिसमें से 56.6 लाख रुपये सिर्फ PUCC उल्लंघन के थे।
पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर जोर और वर्क फ्रॉम होम का नियम
प्रशासन ने यह सुनिश्चित करने के लिए कि आम जनता को परेशानी न हो, दिल्ली मेट्रो और दिल्ली परिवहन निगम (DTC) की बसों के फेरे बढ़ा दिए हैं। वर्तमान प्रतिबंध 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक प्रभावी रहेंगे। इस दौरान दिल्ली के बाहर रजिस्टर्ड BS-III और BS-IV वाहन शहर में प्रवेश नहीं कर पाएंगे। हालांकि, इलेक्ट्रिक वाहनों, CNG गाड़ियों और एम्बुलेंस व फायर टेंडर जैसी आपातकालीन सेवाओं को इससे छूट दी गई है।
प्रदूषण कम करने के लिए अन्य कड़े कदम भी उठाए गए हैं:
- मेट्रो स्टेशनों को छोड़कर अन्य अधिकृत पार्किंग स्थलों पर पार्किंग शुल्क दोगुना कर दिया गया है।
- दिल्ली सरकार और निजी कार्यालयों के लिए 50% वर्क-from-home का आदेश लागू है।
- बिना वैध PUCC के किसी भी वाहन को ईंधन देने पर पेट्रोल पंपों को पाबंदी लगाई गई है।
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग की इस कार्रवाई से दिल्ली-गुरुग्राम बॉर्डर जैसे प्रमुख प्रवेश द्वारों पर भारी ट्रैफिक जाम देखा गया। कई डिलीवरी ड्राइवरों और यात्रियों ने इन नियमों के अचानक लागू होने पर अपनी परेशानी जाहिर की है, क्योंकि यह पिछले GRAP नियमों से अलग है। फिलहाल, प्रभावित लोगों के लिए दिल्ली मेट्रो ही सबसे बड़ा विकल्प बनी हुई है।