दिल्ली में प्रदूषण पर नकेल: 1 नवंबर से BS-VI मानक वाले वाहनों की एंट्री पर सख्ती, PUC नहीं तो नहीं मिलेगा ईंधन

दिल्ली की हवा को साफ रखने के लिए सरकार ने अब कमर कस ली है। पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने प्रदूषण के खिलाफ एक बड़ा एक्शन प्लान साझा किया है। दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में उठाए गए कदमों का असर दिखना शुरू हो गया है, जिसके चलते इस साल अब तक 214 'क्लीन एयर डेज' दर्ज किए गए हैं। कोविड काल को छोड़कर, पिछले एक दशक में यह सबसे बेहतर आंकड़ा है। लेकिन इस जीत को बरकरार रखने के लिए सरकार अब बाहरी वाहनों और PUC सर्टिफिकेट को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाने जा रही है।
सबसे बड़ा बदलाव 1 नवंबर 2026 से लागू होगा, जिसके तहत दिल्ली की सीमा में प्रवेश करने वाले उन बाहरी वाहनों पर प्रतिबंध होगा जो BS-VI उत्सर्जन मानकों को पूरा नहीं करते हैं। हालांकि, कुछ विशेष श्रेणियों और आवश्यक सेवाओं को इस नियम से छूट दी जाएगी। इसके अलावा, सरकार ने 'नो PUC, नो फ्यूल' अभियान को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है। अब दिल्ली के किसी भी पेट्रोल पंप पर उन वाहनों को ईंधन नहीं दिया जाएगा जिनके पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) नहीं होगा।
प्रदूषण रोकने के लिए 11 सूत्रीय योजना और तकनीक का सहारा
मंत्री सिरसा ने बताया कि नीति आयोग और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के दिशा-निर्देशों के तहत 30 एजेंसियां एक 11-सूत्रीय योजना पर काम कर रही हैं। शहर की सीमाओं, खासकर ईस्टर्न और वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे पर वाहनों की कड़ी निगरानी की जा रही है ताकि प्रदूषण फैलाने वाले वाहन अंदर न आ सकें।
प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने तकनीक और मशीनरी का भी सहारा लिया है:
- एंटी-स्मॉग गन: दिल्ली के 283 निर्माण स्थलों पर 608 एंटी-स्मॉग गन लगाई गई हैं, साथ ही 200 ऊंची इमारतों में भी इन्हें तैनात किया गया है।
- सफाई व्यवस्था: सड़कों की धूल कम करने के लिए 103 मैकेनिकल रोड स्वीपर तैनात किए गए हैं।
- निगरानी: इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (I-CCC) के जरिए 24 घंटे निगरानी हो रही है और 311 ऐप के जरिए मिलने वाली शिकायतों पर तेजी से कार्रवाई की जा रही है।
इतना ही नहीं, सरकार 1 नवंबर से 31 जनवरी तक बाहरी निर्माण और विध्वंस कार्यों पर प्रतिबंध लगाने, कचरा जलाने पर रोक, निजी वाहनों को हतोत्साहित करने के लिए पार्किंग शुल्क बढ़ाने और ऑफिसों में 50% कर्मचारियों के लिए वर्क-फ्रॉम-होम की व्यवस्था करने पर विचार कर रही है। हरित क्षेत्र को बढ़ाने के लिए भी लक्ष्य से अधिक काम किया गया है, जहां 70 लाख के लक्ष्य के मुकाबले 78 लाख पौधे लगाए गए हैं।