प्लास्टिक कचरे से मिलेगी मुक्ति, दिल्ली में शुरू होगी बोतल रिफंड स्कीम
दिल्ली सरकार प्लास्टिक कचरा कम करने के लिए बोतल रिफंड स्कीम ला रही है। खाली बोतल लौटाने पर मिलेंगे पैसे।

राजधानी दिल्ली को प्लास्टिक मुक्त बनाने की दिशा में दिल्ली सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। शहर में प्लास्टिक कचरे के बढ़ते ढेर को रोकने के लिए अब 'डिपोजिट रिफंड स्कीम' (DRS) लागू करने की योजना है। इस नई व्यवस्था के तहत जब कोई ग्राहक प्लास्टिक की बोतल खरीदेगा, तो उसे 1 या 2 रुपये अतिरिक्त जमा करने होंगे। जब वह खाली बोतल वापस निर्धारित कलेक्शन सेंटर पर लौटाएगा, तो उसे यह राशि वापस मिल जाएगी। दिल्ली बोतल रिफंड स्कीम का मुख्य उद्देश्य लोगों की 'इस्तेमाल करो और फेंको' की आदत को बदलकर 'इस्तेमाल करो और लौटाओ' की संस्कृति विकसित करना है।
इस योजना को अमली जामा पहनाने के लिए पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने एक अहम बैठक की। दिल्ली सरकार इस मॉडल को तैयार करने के लिए उत्तराखंड और गोवा के सफल प्रयोगों से सीख ले रही है। अधिकारियों ने गोवा डिपॉजिट रिफंड स्कीम अथॉरिटी के पूर्व चेयरमैन डॉ. एंथनी डी सा और उत्तराखंड सरकार के मुख्य पर्यावरण अधिकारी डॉ. अंकुर कंसल से सलाह ली है। शुरुआती तौर पर इस योजना को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर दिल्ली के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर लॉन्च किया जा सकता है, जिसके बाद इसे पूरे शहर में लागू किया जाएगा।
डिजिटल रिफंड और तकनीक का इस्तेमाल
इस स्कीम को पारदर्शी और आसान बनाने के लिए तकनीक का सहारा लिया जाएगा। बोतलों पर क्यूआर कोड (QR Code) लगाए जा सकते हैं, जिससे रिफंड की प्रक्रिया डिजिटल तरीके से पूरी हो सके। दिल्ली सरकार उत्तराखंड के डिजिटल डिपॉजिट रिफंड सिस्टम से प्रेरित है, जो 2022 से चार धाम यात्रा मार्ग पर यूपीआई (UPI) के जरिए रिफंड दे रहा है। साथ ही, गोवा के मॉडल की तरह यहां भी रिवर्स वेंडिंग मशीनों (RVM) और मैनुअल सेंटर्स का नेटवर्क बनाया जा सकता है, ताकि कांच, पीईटी और एल्युमीनियम जैसे कचरे को सही तरीके से रीसायकल किया जा सके।
बता दें कि दिल्ली में हर दिन करीब 1,500 टन प्लास्टिक कचरा पैदा होता है, जिसमें से लगभग 19% कचरा अब तक अनप्रोसेस्ड रहता है। इसी गंभीर समस्या से निपटने के लिए पर्यावरण विभाग को वित्तीय तंत्र और कार्यान्वयन रणनीति पर एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। उम्मीद है कि इस पहल से न केवल सड़कों पर बिखरी बोतलों में कमी आएगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक नई शुरुआत होगी।