दिल्ली में बढ़ रहा 'बुक बैठकों' का नया सांस्कृतिक ट्रेंड, साहित्य प्रेमियों के बीच चर्चा

दिल्ली में साहित्यिक संस्कृति अब 'बुक बैठकों' के रूप में एक नए रूप में सामने आ रही है। यह पारंपरिक पुस्तक विमोचन से अलग अनौपचारिक और छोटी बैठकें हैं, जहां साहित्य और जीवन पर गहरी चर्चा होती है। द टाइम्स ऑफ इंडिया की 25 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, सारा सिद्दीकी द्वारा प्रकाशित यह आयोजन अब शहर के बौद्धिक और सामाजिक जीवन का अहम हिस्सा बनते जा रहे हैं। इन बैठकों से शहर के सांस्कृतिक माहौल में एक नया बदलाव देखने को मिल रहा है।
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि ये बैठकें एक शांत और आरामदायक माहौल देती हैं, जिससे लोगों को अपने विचार खुलकर रखने का मौका मिलता है। गुड़गांव के चैप्टर्स बुकस्टोर की संस्थापक दिशा ने बताया कि यह फॉर्मेट किताबें और निजी कहानियों को एक साथ जोड़कर एक बेहतरीन मुलाकात का जरिया बनता है। सीएमवाईके बुकस्टोर के सह-संस्थापक कपिल कपूर ने कहा कि ऐसे माहौल में वे लोग भी आसानी से दूसरों से जुड़ जाते हैं जो आमतौर पर कम घुलते-मिलते हैं। साहित्य यहां बातचीत का एक आसान माध्यम बन जाता है।
रीड ए किताब की सह-संस्थापक एकता भंडारी ने जोर देकर कहा कि इन आयोजनों में साहित्य के जरिए स्मृति, पहचान, इतिहास और खुद शहर जैसे गंभीर विषयों पर बात होती है। उन्होंने कहा कि बैठक के लिए पारंपरिक साहित्यिक आयोजनों जितनी औपचारिकता की जरूरत नहीं होती, बल्कि यह लोगों को साथ बैठकर लंबी और सार्थक बातचीत करने का मौका देती है। कारवां हेरिटेज जैसे संगठन भी इस बढ़ते आंदोलन से जुड़े हैं, जिसका उद्देश्य शहर की पुरानी संवाद शैली को आधुनिक पठन संस्कृति के साथ जोड़ना है। यह ट्रेंड दिल्ली के लोगों को करीब लाने का काम कर रहा है।