दिल्ली के बायोडायवर्सिटी पार्क्स में मिले 11,154 ड्रैगनफ्लाई और डैम्सफ्लाई, सर्वे में हुआ खुलासा

दिल्ली के सात बायोडायवर्सिटी पार्क्स में 17 से 19 सितंबर 2026 के बीच तीन दिनों तक एक सर्वे किया गया। इस सर्वे के दौरान कुल 11,154 ड्रैगनफ्लाई और डैम्सफ्लाई दर्ज किए गए। इस ताजा वार्षिक गिनती का नाम 'एशिएंट एरियल हंटर्स: व्हाट ड्रैगनफ्लाइज रिवील अबाउट दिल्लीज फ्राइल वेटलैंड्स' रखा गया था। साल 2025 में दर्ज किए गए 13,253 जीवों के मुकाबले इस बार संख्या में कमी आई है। इस सर्वे का नेतृत्व दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) बायोडायवर्सिटी पार्क्स कार्यक्रम ने किया था। इसमें दिल्ली विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, स्वयंसेवकों और छात्रों ने हिस्सा लिया।
पार्क्स में विविधता और नई प्रजातियां
कुल संख्या में गिरावट के बावजूद, शोध में पार्क्स में लगातार प्रजातियों की विविधता देखी गई। कालिंदी बायोडायवर्सिटी पार्क में 15 प्रजातियों के 4,234 जीव मिले, जो सबसे अधिक हैं। वहीं यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क में 23 प्रजातियों के साथ सबसे ज्यादा विविधता दर्ज की गई, जहां कुल 1,156 जीव मिले। इसने पिछले तीन सालों से यह पहचान रखने वाले कमला नेहरू रिज को पीछे छोड़ दिया। अरावली बायोडायवर्सिटी पार्क में येलो-टेल्ड एशी स्किमर और यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क में ब्लू ग्रास डार्ट जैसी नई प्रजातियां देखी गईं।
संख्या घटने के कारण और उनका महत्व
कीट विज्ञानी और सर्वे के प्रमुख मोहम्मद फैसल ने बताया कि घनत्व और विविधता में आई हल्की गिरावट का कारण अनियमित बारिश है। बारिश कम होने से पानी के वे छोटे स्रोत सूख गए जो इन कीटों के जीवन चक्र के लिए जरूरी हैं। वन्यजीव पारिस्थितिकीविद् और टीम लीडर डॉ. आयशा सुल्ताना ने बताया कि ये कीट दिल्ली के शहरी जलीय आवासों की मौसमी स्थिति और कार्यप्रणाली को दर्शाते हैं। DDA बायोडायवर्सिटी प्रोग्राम के प्रभारी वैज्ञानिक फैयाज खुदसर ने कहा कि इन कीटों को साफ और स्थिर जलीय माहौल चाहिए होता है, इसलिए इनकी मौजूदगी ecosystem के स्वास्थ्य का संकेत देती है और मच्छरों को प्राकृतिक रूप से नियंत्रित करने में मदद करती है।
किन-किन पार्क्स में हुआ सर्वे
यह सर्वे DDA द्वारा संचालित यमुना, अरावली, नीला हौज़, तिलपथ वैली, कमला नेहरू रिज, तुगलकाबाद और कालिंदी बायोडायवर्सिटी पार्क्स में किया गया था।