दिल्ली में नंबर प्लेट क्लोनिंग का खुलासा: गलत चालान ने खोली जालसाजों की पोल
दिल्ली के एक व्यक्ति को मिला गलत ट्रैफिक चालान, जिससे खुला नंबर प्लेट क्लोनिंग का बड़ा मामला। जानें कैसे बचें इस धोखाधड़ी से।

राजधानी दिल्ली में नंबर प्लेट क्लोनिंग का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। एक बाइक मालिक को तब गहरा झटका लगा जब उसके घर एक ट्रैफिक चालान पहुंचा, जबकि उसने कोई नियम नहीं तोड़ा था। इस एक गलत चालान ने उस बड़े खेल का खुलासा कर दिया, जिसमें जालसाज दूसरों की गाड़ियों के नंबर अपनी गाड़ियों पर लगाकर घूम रहे हैं।
दरअसल, पीड़ित व्यक्ति को बिना हेलमेट गाड़ी चलाने के आरोप में जुर्माना लगाया गया था। शुरुआत में तो वह इस बात से उलझन में था कि उसने ऐसा कोई उल्लंघन नहीं किया है। लेकिन जब उसने दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के ई-चालान पोर्टल पर जाकर सबूत के तौर पर लगी फोटो देखी, तो उसके होश उड़ गए। फोटो में दिख रही गाड़ी उसकी अपनी नहीं थी, बल्कि एक स्कूटर था जिस पर उसकी बाइक का रजिस्ट्रेशन नंबर लगा हुआ था।
सावधान रहें: कैसे काम करता है यह खेल और क्या करें?
विशेषज्ञों के मुताबिक, अपराधी अक्सर चोरी की गाड़ियों की पहचान छिपाने या भारी जुर्माने से बचने के लिए नंबर प्लेट क्लोनिंग का सहारा लेते हैं। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और परिवहन अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि फर्जी या क्लोन नंबर प्लेट का इस्तेमाल करना एक गंभीर अपराध है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत इसे जालसाजी और धोखाधड़ी माना जाता है, साथ ही मोटर वाहन अधिनियम के तहत भी कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है।
अगर आपको भी ऐसा कोई गलत चालान मिलता है, तो घबराएं नहीं बल्कि ये कदम उठाएं:
- पोर्टल पर जांच करें: सबसे पहले आधिकारिक ई-चालान पोर्टल पर जाकर फोटो देखें कि क्या गाड़ी का मॉडल या रंग आपकी गाड़ी से अलग है।
- FIR दर्ज कराएं: यदि नंबर क्लोनिंग की पुष्टि होती है, तो तुरंत जालसाजी की शिकायत करते हुए पुलिस में FIR दर्ज कराएं।
- चालान को चुनौती दें: FIR की कॉपी ट्रैफिक विभाग को जमा करें ताकि आप उस जुर्माने से बच सकें।
- बीमा कंपनी को सूचित करें: भविष्य में किसी कानूनी पचड़े या क्लेम की समस्या से बचने के लिए अपनी इंश्योरेंस कंपनी को इस घटना की जानकारी दें।
इस तरह की धोखाधड़ी से बचने के लिए अधिकारियों ने हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) लगवाने की सलाह दी है। इन प्लेट्स में लेजर-नक्काशी वाले सीरियल नंबर और टैम्पर-प्रूफ लॉक होते हैं, जिससे क्लोनिंग करना बेहद मुश्किल हो जाता है।