बारापुलला फेज-3 पर भारी जाम: दिल्ली सरकार तलाशेगी समाधान, मुंबई में बदला घाटकोपर ब्रिज का डिजाइन

देश के दो बड़े महानगरों, दिल्ली और मुंबई में इस समय इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर बड़ी हलचल है। जहां दिल्ली के नए खुले बारापुलला फेज-3 फ्लाईओवर पर ट्रैफिक का दबाव इतना बढ़ गया है कि लोग घंटों जाम में फंसे हैं, वहीं मुंबई में घाटकोपर रोड ओवरब्रिज (ROB) के डिजाइन में बड़ा बदलाव किया जा रहा है ताकि भविष्य की जरूरतों को पूरा किया जा सके।
दिल्ली की बात करें तो सितंबर-अक्टूबर में शुरू हुए बारापुलला फेज-3 ने राहत देने के बजाय नई मुसीबत खड़ी कर दी है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने पाया है कि सनडायल पार्क के पास तीन लेन का फ्लाईओवर अचानक दो लेन में बदल जाता है, जिससे यहां भारी बॉटलनेक बन रहा है। स्थिति तब और बिगड़ जाती है जब दो अन्य तीन-लेन वाले रास्तों का ट्रैफिक भी इसी बिंदु पर आकर मिलता है। इसके अलावा, सराय काले खां के पास दिल्ली-मुंबई मोटरवे और आउटर रिंग रोड को जोड़ने के लिए NHAI का काम भी ट्रैफिक की रफ्तार को धीमा कर रहा है।
जाम से निजात के लिए दिल्ली PWD का प्लान
इस गंभीर समस्या को देखते हुए दिल्ली के PWD मंत्री परवेश वर्मा ने कहा है कि सरकार इन डिजाइन खामियों को दूर करने के लिए ठोस उपाय निकाल रही है। एक प्रस्ताव यह है कि आईटीओ और सराय काले खां के बीच रिंग रोड के एक फुटपाथ को सड़क में बदलकर वहां एक नई लेन बनाई जाए, जिससे ट्रैफिक का दबाव कम हो सके। इस मुद्दे पर PWD, दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और NHAI के बीच एक समन्वय बैठक भी बुलाई गई है। फिलहाल, ट्रैफिक पुलिस के जवान मौके पर तैनात हैं ताकि वाहनों की आवाजाही को किसी तरह सुचारू रखा जा सके।
दूसरी ओर, मुंबई में घाटकोपर रोड ओवरब्रिज के निर्माण में एक बड़ा मोड़ आया है। करीब 30 प्रतिशत काम पूरा होने के बाद अब इस ब्रिज को फिर से डिजाइन किया जा रहा है। महाराष्ट्र रेल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (Maha Rail) के मुताबिक, अब यहां 'टू-टियर' ब्रिज सिस्टम बनाया जाएगा। इसमें निचले स्तर पर श्रेयस (LBS) जंक्शन और पंत नगर जंक्शन के बीच स्थानीय ट्रैफिक चलेगा, जबकि मुख्य केबल-स्टेयड स्ट्रक्चर को 2+2 लेन के बजाय 3+3 लेन में चौड़ा किया जाएगा।
इस बदलाव के लिए तीन पियर कैप्स (R, RP16, और RP17) को आंशिक रूप से तोड़कर फिर से बनाया जा रहा है ताकि ब्रिज की ऊंचाई बढ़ाई जा सके। अधिकारियों का मानना है कि यह नया डिजाइन अगले 80 से 100 वर्षों तक ट्रैफिक की बढ़ती मांग को आसानी से संभाल लेगा।