दिल्ली में यमुना नदी में मूर्ति विसर्जन पर सख्त प्रतिबंध, बनाए गए 78 कृत्रिम तालाब

दिल्ली में गणेश विसर्जन की शुरुआत हो गई है और अधिकारियों ने यमुना नदी तथा अन्य प्राकृतिक जल स्रोतों में मूर्तियों के सीधे विसर्जन पर सख्त प्रतिबंध लगा दिया है। सीएम रेखा गुप्ता के निर्देश पर अनुष्ठानों को सुगम बनाने के लिए दिल्ली सरकार ने शहर भर में 78 कृत्रिम तालाबों का निर्माण किया है। रिपोर्ट के अनुसार इन स्थलों का वितरण इस प्रकार है: पश्चिम दिल्ली में 20, पूर्वी दिल्ली में 20, उत्तर-पश्चिम दिल्ली में 12, दक्षिण-पूर्व दिल्ली में 10, दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में 10, शाहदरा, दक्षिण और उत्तर-पूर्व दिल्ली में पांच-पांच, मध्य दिल्ली में चार और उत्तर दिल्ली में दो। विसर्जन समारोह शुरू हो चुके हैं लेकिन मुख्य आयोजन 24 सितंबर के लिए निर्धारित है।
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण के आदेशों का हवाला देते हुए पर्यावरण के क्षरण को रोकने के लिए 9 सितंबर को कड़े दिशानिर्देश जारी किए। समिति चेतावनी देती है कि प्लास्टर ऑफ पेरिस, जहरीले रासायनिक रंगों और भारी धातुओं वाली मूर्तियां पानी की गुणवत्ता को गंभीर रूप से दूषित करती हैं और जलीय जीवन को खतरे में डालती हैं। जल अधिनियम 1974 की धारा 33ए के तहत नियम तोड़ने वालों को छह साल तक की कैद और 50,000 रुपये का जुर्माना भुगतना होगा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के संशोधित दिशानिर्देशों के बाद निर्माताओं को केवल प्राकृतिक मिट्टी और जैव-निम्नीकरणीय सामग्रियों का उपयोग करने का आदेश दिया गया है।
सार्वजनिक लोगों को घरेलू बाल्टी या नामित आरडब्ल्यूए-प्रबंधित टैंकों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। विसर्जन से पहले अलग खाद या कचरा निपटान के लिए सजावटी सामग्री और फूलों को हटाना होगा। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति विसर्जन प्रक्रिया से पहले और बाद में पानी की गुणवत्ता का परीक्षण करेगी। दिल्ली पुलिस को प्रतिबंधित मूर्तियों के लिए वाहनों की निगरानी करने और अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए विनिर्माण स्थलों का निरीक्षण करने का काम सौंपा गया है।